Sonbhadra News :प्रकृति पर भी चढ़ा होली का खुमार,फूलों में आ गई रंगत

बसन्त ऋतु के बाद ही प्रकृति अपना यौवन बिखेरना शुरू कर देती है और वातावरण में उल्लास छा जाता है।नव पल्लवों से सुसज्जित पेड़ पौधे ,आम के बौर एवं महुए की मादकता से मस्त कोयल की कूक बिरहिनो के लिए दिल में

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दुद्धी अमवार मार्ग पर स्थित पलाश के फूल

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7:09 AM, March 9, 2025

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रमेश यादव (संवाददाता )




दुद्धी, सोनभद्र ।बसन्त ऋतु के बाद ही प्रकृति अपना यौवन बिखेरना शुरू कर देती है और वातावरण में उल्लास छा जाता है।नव पल्लवों से सुसज्जित पेड़ पौधे ,आम के बौर एवं महुए की मादकता से मस्त कोयल की कूक बिरहिनो के लिए दिल में हूक बनकर टीस पैदा करती है।इस रंगों की होली में नव नवेली दुल्हन अपने पिया की बाट जोहती है।होली के पास आते ही प्रकृति भी रंगों से सराबोर हो जाती है। रवि की फसलें भी बसन्ती बयार के कारण अपने परिपक्वता की उफान पर होती है।सेमल व पलाश के पेड़ों पर उगने वाले मोहक फूल केवल प्रकृति का श्रृंगार ही नही करते अपितु मानव भी इसे अपने लिए उपयोगी बना लेते है।गाँवों में पलाश के फूलों से रंग बनाये जाने की परम्परा के ह्रास होने से कृतिम रंगों का प्रयोग चलन में तेजी से बढ़ा है।जिसका साइड इफेक्ट 100%देखने को मिल रहा है। दुद्धी क्षेत्र में पलाश के पेड़ों पर लगे मनमोहक पुष्प हर किसी को आकर्षित कर रहे हैं।सुंदर छटा विखेरती पलाश के लाल पुष्पों से सजे पलाश के पेड़ आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं।सड़कों किनारे स्थित पलाश के फूलों को देखकर राही भी खूबसूरत फूलों को अपने मोबाइल में कैद करते हुए देखें जा रहे है। वहीं पलाश के फूलों से होली का रंग भी बनाने का सिलसिला शुरू हो गया है। हालांकि अब धीरे - धीरे पलाश के पेड़ों पर पुष्प कम आ रहे हैं।जिसकी वजह बताते हुए पर्यावरण चिंतक जगत विश्वकर्मा कहते है कि ग्लोबल वार्मिंग के दौर में बढ़ते जा रहे कल-कारखानों से निकलने वाले प्रदूषण इसके लिए सबसे बड़े जिम्मेदार है।उनकी माने तो प्रदूषण एवं वनों की कटान की वजह से पर्यावरण बुरी तरह प्रभावित है।इसका असर मानव जीवन सहित अन्य प्राणियों एवं पेड़ पौधों पर भी देखा जा सकता है। 

इनसेट - - पलाश को प्राप्त है राज्य पुष्प का दर्जा - 
दुद्धी, सोनभद्र। ग्रामीण क्षेत्रों में पलाश के पेड़ों पर लाह उगाया जाता रहा है जिससे सरकार को राजस्व के रूप में आमद होती है।इसका बीज कृमिनाशक होने के वजह से चिकित्सा जगत में भी उपयोगी सिद्ध होता है।पुराने लोग बताते है कि गर्मी के दिनों में पलाश के पुष्प का प्रयोग शर्बत में किया जाता है क्योकि इसकी तासीर ठण्डी होती है।ईंधन के अलावे आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है।इन्ही सब बजहों से उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे राज्य पुष्प का दर्जा दे रखा है।

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