वाराणसी

अब आकर्षक और सुरक्षित पैकिजिंग के साथ बाजार में उतरेगी काशी की पारम्परिक गुलाबी मीनाकारी

◆ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग के रिसर्च के बाद गुलाबी मीनाकारी की पैकेजिंग पहले से तीन गुना हुई सस्ती

◆ पीएम मोदी और सीएम योगी ने काशी के प्राचीन हुनर को दिलाई है अंतरराष्ट्रीय पहचान

वाराणसी । काशी की प्राचीन गुलाबी मीनाकारी कला को आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है। पीएम मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से अब इसकी पैकेजिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वाराणसी का जीआई और ओडीओपी उत्पाद गुलाबी मीनाकारी के शिल्पियों को अब अपने हुनर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजना आसान हो जायेगा। प्रदेश सरकार और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पैकेजिंग के बीच हुए करार के बाद गुलाबी मीनाकारी की आकर्षक और सुरक्षित पैकेजिंग की जा सकेगी। इसी के तहत भारतीय पैकेजिंग संस्थान ने 1 व 2 फरवरी को गुलाबी मीनाकारी हस्तशिल्प के लिए पैकेजिंग डिजाइन और विकास पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया।

क्लस्टर के माध्यम से उत्पादों का होगा निर्यात

काशी की पारम्परिक और प्राचीन हुनर गुलाबी मीनाकारी को अब सुरक्षित पैकिजिंग मिलने जा रहा है। भारतीय पैकेजिंग संस्थान ने रिसर्च करके पैकेजिंग की नई तकनीक को विकसित किया है, जिससे जीआई और ओडीओपी के उत्पादों को अब आकर्षक और सुरक्षित पैकिंग मिलेगी। उपायुक्त उद्योग मोहन शर्मा ने बताया कि करीब 5 माह पहले इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पैकजिंग के अधिकारी वाराणसी आये थे। इस दौरान वे ख़ास करके वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी के उत्पाद का नमूना साथ ले गए थे, जिससे उत्पाद के अनुसार बेहतर पैकेजिंग उपलब्ध करायी जा सके। सरकार का लक्ष्य है कि जल्दी ही क्लस्टर के माध्यम से उत्पादों का निर्यात किया जाए।

अच्छी पैकिंग के बगैर मात खा रहा था हुनर

सीनियर कंसल्टेंट ओडीओपी दौलत राम ने बताया कि हस्तशिल्पियों का हुनर अच्छी पैकिंग के बगैर मात खा रहा था। अब आईआईपी ने हैंडीक्राफ्ट के उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए सुन्दर पैकिंग की डिजाइन तैयार कर दी है। जो संस्थान के रजिस्टर वेंडरों द्वारा बनकर जल्दी ही बाजार में उपलब्ध होगा। इस पैकजिंग की ख़ास बात ये है कि अभी तक इस्तेमाल हो रहे पैकजिंग से ये करीब 3 गुना सस्ता और अच्छा होगा।

शिल्पियों को दी गयी पैकेजिंग की जानकारी

आईआईपी दिल्ली के डिप्टी डायरेक्टर राहुल तिरपुडे ने दो दिवसीय कार्यशाला में शिल्पियों को पैकेजिंग की बारीकियां, उत्पादों को आकर्षक बनाना और उत्पाद के लिए पैकेजिंग क्यों आवश्यक है, इसके बारे में विस्तार से बताया।

योगी सरकार और आईआईपी के साथ समझौता

उत्तर प्रदेश के उद्योग विभाग के ओडीओपी सेल ने भारतीय पैकेजिंग संस्थान के साथ ओडीओपी योजना के तहत समझौता किया है। शुरुआत में बनारस-गुलाबी मीनाकारी, बांदा-स्टोन वर्क, मुरादाबाद-पीतल कार्य, फ़िरोज़ाबाद – ग्लास वर्क जैसे 5 विभिन्न जिलों से 5 उत्पादों को पैकेजिंग डिजाइन के लिए चुना गया है।

अबतक ज्वेलरी के डिब्बे में भेजते थे गुलाबी मीनाकारी

नेशनल अवार्डी कुञ्ज बिहारी, बलराम और रमेश विश्वकर्मा ने बताया कि अभी तक हम लोग ज्वेलरी के बॉक्स में गुलाबी मीनाकारी के महंगे उत्पादों को बाहर भेजते रहे हैं। अच्छी पैकिजिंग नहीं होने से उत्पादों को बिचौलियों के पास भेजना पड़ता था। अब हमारे उत्पादों को सुरक्षित और देखने में आकर्षक पैकिजिंग मिलने से शिल्पी अपना हुनर सीधे राष्ट्रीय और अंतरर्राष्ट्रीय बाजार में में बेच सकेंगे और पूरा मुनाफा आर्टिजंस को मिलेगा। हस्तशिल्पियों ने बताया कि मर रही गुलाबी मीनाकारी को मोदी और योगी ने जिंदा कर दिया है, जिससे हजारों परिवार को रोजगार मिल रहा है।

क्या है भारतीय पैकेजिंग संस्थान

इस संस्थान का मुख्य उद्देश्य अभिनव पैकेज डिजाइन और विकास के माध्यम से निर्यात बाजार को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय स्तर पर पैकेजिंग मानकों का उन्नयन करना है। संस्थान के मुख्य कार्य पैकेजिंग में शिक्षा और पैकेजिंग के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास है। संस्थान घरेलू और निर्यात बाजार के लिए पैकेजिंग सामग्री और पैकेजिंग के परीक्षण और प्रमाणन जैसी विभिन्न गतिविधियों में शामिल है।

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