सोनभद्र

माँगों के समर्थन में प्रधानों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन

आनंद कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । आज राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के बैनर तले जिले के ग्राम प्रधानों ने कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष गोपीनाथ गिरी के नेतृत्व में विभिन्न मंगोके समर्थन में कलेक्ट्रेट पहुँच प्रदर्शन कर उपजिलाधिकारी सोनभद्र को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री तथा मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन के माध्यम से प्रधानों ने कहा कि “यह वर्ष देश की आजादी के अमृत महोत्सव के रूप मनाया जा रहा है, किंतु ग्राम स्वराज की परिकल्पना अभी भी अधूरी है। पंचायतें अभी भी स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर पा रही हैं जबकि संविधान में उनको स्वतंत्र इकाई का दर्जा प्राप्त है जिसके कारण पंचायतों में आए दिन निरंतर समस्याएं बढ़ती जा रही है।

प्रधानों ने समस्याओं से अवगत करते हुए आगे बताया कि 6 माह बीत जाने के बाद भी पंचायतों में मनरेगा योजना से कराए गए कार्यों के सामग्री अंश का तत्काल भुगतान किया जाए। मनरेगा योजना में मोबाइल ऐप से हाजिरी पर रोक लगाई जाए क्योंकि जिले की अधिकांश ग्राम पंचायतों में नेटवर्क की समस्या बनी हुई है ऐसी दशा में कार्यस्थल पर मोबाइल ऐप से मजदूरों की हाजिरी नहीं लगाई सकती। विगत 15 दिसम्बर 2021 को मुख्यमंत्री ने लखनऊ में आयोजित प्रधान सम्मेलन में यह घोषणा किया था कि ₹5 लाख तक के वित्तीय स्विकृति का अधिकार पंचायतों को सौंप दिए जाएंगे तथा मनरेगा योजना के डोंगल भी अब ग्राम पंचायतों में ही ग्राम प्रधान व सचिव द्वारा लगाए जाएंगे किंतु उसका शासनादेश अभी तक जारी नहीं हुआ। वहीं प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव 2021 के बाद गठित पंचायतों का कार्यकाल पूरा किए बगैर डेढ़ साल बाद ही उनको नगर पंचायत/नगर पालिका परिषद में सम्मिलित करने का आदेश वापस लिया जाए। राज्य वित्त एवं केंद्रीय वित्त की धनराशी जो पंचायत के खाते में भेजी जा रही है उससे पंचायतों की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं पा रहा है जबकि शहरी क्षेत्रों में अधिक दर से धनराशि भेजी जाती है इसलिए ग्राम पंचायतों एवं शहरी क्षेत्रों में एक ही दर से धनराशि भेजी जाए। ग्राम प्रधानों एवं पंचायत में अन्य संविदा कर्मियों तथा बिजली बिल के भुगतान हेतु अलग से धनराशि पंचायतों के खाते में भेजी जाए। पंचायतों के अंतर्गत निहित ग्राम सभा की संपत्तियों का सीमांकन न होने के कारण अतिक्रमण बढ़ता ही जा रहा है इसीलिए सीमांकन का तत्काल आदेश जारी किया जाए। पंचायत की शिक्षा समिति को मानते हुए विद्यालय प्रबंध समिति को तत्काल समाप्त किया जाए। प्रधानों की सुरक्षा हेतु उनके अनुरोध पर प्राथमिकता के आधार पर शस्त्र लाइसेंस प्रदान किए जाएं। पंचायतों में किसी भी कार्यदाई संस्था द्वारा कार्य कराए जाने के पहले ग्राम पंचायतों से अनापत्ति प्रमाण लेने के बाद ही कार्य कराए जाएं ताकि एक ही काम को दो कार्यदायी संस्थाएं ना कर सकें। कोटेदारों द्वारा ग्राम प्रधानों से बिना वितरण रजिस्टर प्रमाणित कराए ही अगला डिमांड कर लिया जाता है इस पर तत्काल रोक लगाई जाए । आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को निर्देश मिलने के बावजूद भी ग्राम प्रधानों से अपना स्टॉक रजिस्टर कभी भी चेक नहीं कराना यह भारी अनियमितता है, इस पर भी तत्काल रोक लगाई जाए।”

इस दौरान प्रधानों ने सभी समस्याओं के तत्काल समाधान की मांग करते हुए कहा कि यदि समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीण विकास कार्य ठप हो जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

इस दौरान लक्ष्मी कुमार जायसवाल, मोहन पांडेय, अरविंद कुमार पटेल, इंद्रजीत यादव, जितेंद्र बाल्मीकि, रामशकल, आनन्द प्रकाश पटेल, विनोद मौर्या, प्रकाश सोनकर समेत भारी संख्या में प्रधानगण मौजूद रहे।

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