योगी सरकार का मिला सहारा, गरीबी को पीछे छोड़ लखपति बनी सोनभद्र की विनीता
एक संयुक्त परिवार की सदस्य विनीता कभी गरीबी और निराशा के साये में जी रही थीं, अब 40 से अधिक गायों की मालिक हैं और काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी की बदौलत आज ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।

varanasi
1:36 PM, April 8, 2025
शान्तनु कुमार
★ कौड़ियों के भाव दूध बेचकर गुजारा कर रही विनीता को मिला काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी का साथ*
★ विनीता ने ॐ महिला सहायता समूह के जरिए काशी मिल्क से हाथ मिलाया और अपनी मेहनत को दी नई दिशा*
★ काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी की पहली पांच लखपति दीदियों में से एक हैं विनीता*
★ सीएम योगी ने हम महिलाओं के सपनों के हकीकत में बदलने का दिया मौका- विनीता*
★ ग्रामीण आजीविका मिशन की बदौलत हम महिलाएं भी अब अपना परिवार चलाने में सक्षम हैं- विनीता*
लखनऊ । उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के छोटे से गांव प्रसिद्धी में एक साधारण महिला की असाधारण सफलता आज हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा बन गई है, जो अपने सपनों को सच करने की कोशिश में है। एक संयुक्त परिवार की सदस्य विनीता कभी गरीबी और निराशा के साये में जी रही थीं, अब 40 से अधिक गायों की मालिक हैं और काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी की बदौलत आज ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। यह सफलता की गाथा केवल उनकी मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) की क्रांतिकारी पहल का जीवंत उदाहरण है। विनीता की कहानी उन लाखों ग्रामीण महिलाओं के लिए एक मिसाल है, जो योगी सरकार की योजनाओं आर्थिक सशक्तीकरण के रास्ते पर चलकर अपनी जिंदगी को नई दिशा दे रही हैं।
संघर्ष को मिला योगी सरकार का साथ, बदली जिंदगी
विनीता की जिंदगी कभी आसान नहीं थी। तरावा ग्राम पंचायत के प्रसिद्धी गांव में रहने वाली यह स्नातक महिला अपने 14 सदस्यों वाले परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालती थीं। विनीता बताती हैं कि उनके पास 10-12 गायें थीं, जिनका दूध वे निजी डेयरियों को बेचती थीं। दिन-रात मेहनत के बावजूद उचित मूल्य और समय पर भुगतान न मिलने से उनका जीवन संघर्षों से भरा था। विनीता याद करते हुए बताती हैं कि पहले हमारी मेहनत का सही फल नहीं मिलता था। दूध बेचने के बाद भी घर का खर्च चलाना मुश्किल था। बच्चों की पढ़ाई और परिवार की बुनियादी जरूरतें एक सपने जैसी थीं। लेकिन किस्मत ने उनके लिए एक नया मोड़ तब लिया, जब उन्होंने काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी के बारे में सुना। कंपनी की उचित मूल्य नीति और किसानों को हर संभव मदद देने का वादा उनके लिए आशा की एक किरण बन गया। आज उनके पास 40 गाएं हैं, महिलाओं का एक स्वयं सहायता समूह है जिसके जरिए वो आज क्षेत्र की तमाम ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई।




