वाराणसी में दिखा कोलकाता जैसा नजारा, दुर्गा मूर्ति विसर्जन से पहले महिलाओं ने खेली सिंदूर खेला का रश्म
दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली समाज में सिंदूर खेला की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मां दुर्गा के विसर्जन से पहले मांग सिंदूर से भर कर उनकी विदाई की जाती है । अब यह परंपरा पूरे वाराणसी में देखा जा रहा।

varanasi
3:48 PM, October 13, 2024
वाराणसी । दुर्गा पूजा हिंदू धर्म का एक प्रसिद्ध व महत्वपूर्ण त्योहार है जो शक्ति की आराधना का पर्व है। नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना की जाती है। वैसे तो देश भर में इसकी धूम रहती है । लेकिन दुर्गा पूजा में मिनी कोलकाता के रूप में जाने जानी वाली काशी का नजारा ही कुछ अलग देखने को मिलता है । दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली समाज में सिंदूर खेला की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मां दुर्गा के विसर्जन से पहले मांग सिंदूर से भर कर उनकी विदाई की जाती है सिंदूर खेला का रस्म पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में पहली बार शुरू हुई थी जिसकी झलकी अब काशी में भी दिखने लगी है । ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा साल में एक बार अपने पुत्र गणेश और कार्तिकेय के साथ अपने मायके आती हैं वह अपने मायके में 10 दिन रुकती हैं, जिसे दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है। फिर दशमी को सिंदूर खेला यानी कि मां को सिंदूर अर्पित कर विदा किया जाता है। इस दिन महिलाएं सज-धज कर मां दुर्गा को विदाई देती है। नवरात्रि के आखिरी दिन बंगाली समुदाय के लोग धुनुची नृत्य कर मां को प्रसन्न करती हैं।




