UP News : सनातन की ताकत आस्था और आस्था की आत्मा पर्व-त्योहार- सीएम योगी
गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन धर्म जितनी समृद्ध पर्व-त्योहारों की परंपरा दुनिया के किसी भी अन्य देश में या मत, मजहब के पास नहीं है।

gorakhpur
6:55 PM, March 14, 2025
◆ घंटाघर से निकलने वाली भगवान नृसिंह की रंगभरी शोभायात्रा में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री
◆ सनातन धर्म जितनी पर्व-त्योहार की समृद्ध परंपरा दुनिया में अन्यत्र कहीं नहीं- सीएम योगी
◆ कोसने वालों ने भी महाकुंभ में देखा सनातन धर्म का सामर्थ्य- मुख्यमंत्री
गोरखपुर । गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन धर्म जितनी समृद्ध पर्व-त्योहारों की परंपरा दुनिया के किसी भी अन्य देश में या मत, मजहब के पास नहीं है। हमारी आस्था ही सनातन धर्म की ताकत है और आस्था की आत्मा पर्व, त्योहार में है। सनातन पर्व परंपरा में दक्षिण से उत्तर तक, पूरब से पश्चिम तक वर्षभर उत्साह और उमंग से जुड़ने का अवसर भारतवासियों को प्राप्त होता है।
सीएम योगी शुक्रवार को होली के पावन महापर्व पर घंटाघर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व श्री होलिकोत्सव समिति की ओर से निकलने वाली भगवान नृसिंह की रंगभरी शोभायात्रा के शुभारंभ अवसर पर उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। सभी प्रदेशवासियों को होली की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पौराणिक गाथा गाथा के अनुसार भारत में जन्म लेना दुर्लभ है। और, उसमें भी मनुष्य रूप में, सनातन धर्म में जन्म लेना और भी दुर्लभ। जो लोग सनातन को कोसते थे उन्होंने भी सनातन का सामर्थ्य प्रयागराज महाकुंभ में देखा है। प्रयागराज महाकुंभ में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पावन त्रिवेणी में स्नान कर पुण्य के भागीदार बने। दुनिया में कहीं भी, किसी भी क्षेत्र में, किसी भी जाति का, किसी भी भाषा को बोलने वाला सनातनी रहा हो, उसने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाकर जीवन को धन्य बनाया है।
*महाकुंभ को विस्मयकारी भाव से देख रही थी दुनिया*
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ को दुनिया विस्मयकारी भाव से, कौतूहल भरी निगाहों के साथ देख रही थी। जबकि सनातन धर्म के लोग इस महाकुंभ के माध्यम से पूरे विश्व को एकता का संदेश देने के लिए जुड़े हुए थे। प्रयागराज में अद्भुत मर्यादा और अद्भुत अनुशासन देखने को मिला। वहां ऐसी एक भी घटना नहीं हुई जिसके कारण सनातनी लोगों को सिर नीचे करना पड़ता।




