UP News : सहारनपुर में नकली सिक्के बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, पांच गिरफ्तार
इनके कब्जे से 20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के, सिक्के बनाने की मशीनें, डाई, अन्य उपकरण, नकदी और दो कारें बरामद की गई हैं।

saharanpur
11:42 AM, September 14, 2026
सहारनपुर। थाना कोतवाली नगर पुलिस, एसओजी, स्वाट और सर्विलांस की संयुक्त टीम ने नकली सिक्के तैयार कर बाजार में खपाने वाले गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 20 रुपये के 6,400 नकली सिक्के, सिक्के बनाने की मशीनें, डाई, अन्य उपकरण, नकदी और दो कारें बरामद की गई हैं।
पुलिस के अनुसार, मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर चेकिंग के दौरान आरोपियों को पकड़ा गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह निवासी मोहाली, पंजाब, हिमांशु उर्फ गुल्लू निवासी सहारनपुर, कुलदीप निवासी मुजफ्फरनगर, संतोष चौरसिया उर्फ जनार्दन निवासी मधुबनी, बिहार और अनुराग पाल उर्फ लंकेश निवासी भदोही के रूप में हुई है।
1.28 लाख रुपये के नकली सिक्के बरामद
पुलिस ने आरोपियों के पास से 20 रुपये मूल्य के 6,400 नकली सिक्के बरामद किए हैं, जिनकी कुल कीमत 1.28 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा 10 हजार रुपये नकद, आठ मोबाइल फोन, सिक्के बनाने की पांच लोहे की डाई, छह मशीनें, डाई पॉलिश करने की मशीन, घिसाई के पत्थर, हथौड़े, रेती, रिंच, पेचकश, प्लास, वर्नियर कैलिपर्स, इलेक्ट्रॉनिक कांटा, ओवन, अधबने सिक्के, सात हिसाब-किताब रजिस्टर/पैड और चेकबुक भी बरामद हुई हैं।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से स्विफ्ट डिजायर और ईको स्पोर्ट कार भी बरामद की हैं।
बाजार और ठेकों पर खपाते थे नकली सिक्के
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे मशीनों और डाई की मदद से 20 रुपये के नकली सिक्के तैयार करते थे। इसके बाद इन्हें बाजार, सरकारी शराब के ठेकों, टोल टैक्स और छोटी दुकानों पर चलाया जाता था।
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में गिरोह के सदस्यों ने दावा किया कि अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के बाजार में खपाए जा चुके हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस इसकी जांच कर रही है।
अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते थे गिरोह के सदस्य
एसएसपी अभिनंदन के अनुसार, गिरोह का नेटवर्क काफी व्यवस्थित था। इसमें अलग-अलग लोग निर्माण, प्लांट लगाने, वित्तीय मदद और लॉजिस्टिक सपोर्ट की जिम्मेदारी संभालते थे। नकली सिक्कों को आगे छोटे खरीदारों, शराब के ठेकों और दुकानों के माध्यम से बाजार में पहुंचाया जाता था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी प्रतिदिन औसतन 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार करने की क्षमता रखते थे। उनके पास से प्रेस, रोलर्स और सिक्के बनाने में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण भी मिले हैं।
मुख्य सरगना पहले सुनार का काम करता था
पुलिस ने उपकार लूथरा को गिरोह का मुख्य सरगना बताया है। वह मोहाली, पंजाब का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, वह वर्ष 2001 के आसपास से नकली सिक्के बनाने के धंधे में सक्रिय था। बताया गया कि उसने पहले सुनार के रूप में काम किया और बाद में कुछ लोगों के संपर्क में आने के बाद नकली सिक्के तैयार कर मुनाफा कमाने लगा।
एसएसपी के मुताबिक, गिरोह के कुछ सदस्य पहले दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं। पुलिस को जानकारी मिली है कि इनमें से कुछ की मुलाकात जेल में हुई थी, जिसके बाद उनका नेटवर्क धीरे-धीरे विस्तारित हुआ।
सहारनपुर में प्लांट लगाने की थी तैयारी
पुलिस जांच में गिरोह का नेटवर्क पंजाब, सहारनपुर, बदायूं, भदोही और बिहार के मधुबनी तक फैला होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन और दस्तावेजों का विश्लेषण कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी सहारनपुर में भी नकली सिक्के बनाने का प्लांट शुरू करने की योजना बना रहे थे, लेकिन इससे पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
संपत्ति और अन्य नेटवर्क की भी होगी जांच
एसएसपी अभिनंदन ने बताया कि मुख्य आरोपी के खिलाफ पहले से आपराधिक इतिहास होने की जानकारी मिली है। दिल्ली पुलिस की ओर से उसके ऊपर इनाम घोषित होने की बात भी सामने आई है, जिसकी पुष्टि की जा रही है।
उन्होंने कहा कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने के लिए जांच आगे बढ़ाई जा रही है। यदि अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति का पता चलता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गिरोह का नेटवर्क केवल नकली सिक्कों तक सीमित था या नकली नोटों से भी उसका कोई संबंध रहा है। एसएसपी के अनुसार, अब तक की जांच में नकली नोट चलाने से जुड़ी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल गिरोह का मुख्य फोकस नकली सिक्कों के निर्माण और कारोबार पर ही पाया गया है।




