शासन की ओर से सभी विभागों को उनकी जरूरत के अनुसार विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और विभागीय कार्यों को संपन्न करने के लिए बजट आवंटित किया गया था लेकिन सत्र के समापन पर जिस विभागों ने बजट नहीं खर्च नहीं कर पाए उन्हें सरकारी खजाने में बजट वापस भेजना पड़ा। जिसमें डीएम कार्यालय ने ₹6. 47 अरब, पीडब्ल्यूडी ने ₹66.98 करोड़, पुलिस विभाग ने ₹22. 32 करोड़, स्वास्थ्य विभाग ने 11. 93 करोड़, होम्योपैथिक विभाग ने 11. 13 करोड़, वन विभाग विभाग ने ₹1. 19 करोड़, बेसिक शिक्षा विभाग ने ₹2.70 करोड़, उच्च शिक्षा ने ₹41. 59 लाख, होमगार्ड विभाग ने ₹7. 71 लाख, सिंचाई विभाग ने ₹2. 77 करोड़, आयुर्वेद विभाग ने ₹39 लाख, पंचायती राज विभाग ने ₹21. 11 लाख, विकास भवन ने ₹10 लाख, उद्यान विभाग ने ₹1.38 लाख, पशुपालन विभाग ने ₹1.27 लाख, आबकारी विभाग ने ₹73 हजार सरेंडर किया।