Sonbhadra News :......... ज़ब धरती का भगवान बना 'दलाल', जानें क्या है पूरा मामला
धरती पर यदि किसी को भगवान का दर्जा दिया गया है तो वह डॉक्टर है, क्योंकि डाक्टर ही है जो किसी इंसान को जीवनदान देता है। किसी को भी जटिल से जटिल बीमारी से बाहर निकालकर नया जीवन दे सकता है। लेकिन सोचिए,.

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12:14 AM, September 28, 2024
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । धरती पर यदि किसी को भगवान का दर्जा दिया गया है तो वह डॉक्टर है, क्योंकि डाक्टर ही है जो किसी इंसान को जीवनदान देता है। किसी को भी जटिल से जटिल बीमारी से बाहर निकालकर नया जीवन दे सकता है। लेकिन सोचिए, यदि डॉक्टर ही मरीजों दलाली करने लगे तो क्या होगा।
ऐसा ही हैरान कर देने वाला एक मामला जनपद सोनभद्र में देखने को मिला। जिले के गरीब मरीजों को शोषण से बचाने के लिए सरकार ने बेहतरीन पहल करते हुए जिले में पीपीपी मॉडल पर 100 शैय्या मातृ एवं शिशु विंग का संचालन शुरू कराया लेकिन सरकार का यह फैसला जनपदवासियों को राहत देने के बजाय उनके लिए आफत बन गया है। बेहतर और सस्ते इलाज के लिए यहाँ आने वाले मरीजों को यहाँ दलालों द्वारा निजी हॉस्पिटल भेजवा दिया जाता था लेकिन अब दलाली के इस खेल में यहाँ तैनात डॉक्टर भी उतर गए हैं। इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में बकायादा अपने हॉस्पिटल का पंजीकरण कराया है। ऐसा ही एक मामला आज उस वक्त सामने आया ज़ब स्वर्ण जयंती चौक स्थित एक निजी हॉस्पिटल का भारी भरकम बिल नहीं चुका पाने के कारण हॉस्पिटल संचालक ने नवजात को चार घंटों के लिए बंधक बना लिया। वहीं चार घंटे बाद बिल चुकता करने के बाद डॉक्टर ने किसी तरह से नवजात की छुट्टी तो कर दी लेकिन परिजनों को फोन कर न सिर्फ उनके साथ गाली गलौज किया गया बल्कि उन्हें जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए देख लेने की धमकी भी दी। उधर घटना से डरे सहमे परिजनों ने कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर कार्यवाही की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, तीन दिन पूर्व झारखण्ड निवासी पूजा पत्नी इंद्रेश पाण्डेय को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने लोढ़ी स्थित एमसीएच में भर्ती कराया था जहाँ उसका सफल प्रसव हुआ और उसने एक बच्चे को जन्म दिया। बच्चे को सांस लेने में तकलीफ होने पर एमसीएच में तैनात डॉ0जे0एस0गुप्ता ने नवजात को जिला अस्पताल भेजने के बजाय नगर के स्वर्ण जयंती चौक पर संचालित अपने निज हॉस्पिटल केयर हॉस्पिटल और बाल चिकित्सालय में भर्ती कर लिया गया और आज ज़ब परिजनों द्वारा नवजात को डिस्चार्ज करने की बात की तो पहले तो डॉक्टर साहब भड़क गए और कई पेपरों पर नवजात के परिजनों का हस्ताक्षर करा लिया। परिजनों द्वारा नवजात की छुट्टी की बात पर अड़े रहने और ज्यादा दबाव बनाता देख उन्होंने 20 हजार रूपये का भारी भरकम बिल थमाते हुए बिल भुगतान होने तक बच्चे के पास भी नहीं फटकने की परिजनों को हिदायत दे डाली। वहीं परिजनों द्वारा तीन-चार घंटे बाद कहीं से पैसे का इंतजाम कर बिल भुगतान कर दिया गया और बच्चे को डिस्चार्ज कराया लेकिन परिजनों से खफा डॉक्टर अब नवजात के चाचा लवकुश मिश्रा को फोन कर गाली देते हुए FIR कराने और जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए देख लेने की धमकी देने लगा। जिस पर लवकुश ने कोतवाली में तहरीर देकर डॉक्टर के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की मांग की है।




