Sonbhadra News : आरओबी निर्माण शुरू होने से थमी रफ्तार, छह माह तक लंबा चक्कर लगाने को मजबूर होंगे लाखों लोग
विकास के नाम पर जनता को परेशानी के भंवर में धकेलने का एक और मामला सामने आया है। जोगियाबीर महाल रेलवे क्रॉसिंग पर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण कार्य शुरू होते ही प्रशासन ने रॉबर्ट्सगंज-खलियारी......

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11:21 PM, June 16, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• बिना वैकल्पिक मार्ग तैयार किए बंद कर दी गई मुख्य सड़क
• नगवां, चतरा और बिहार सीमा से आने-जाने वालों की बढ़ी मुश्किलें, स्थानीय जनता में रोष
सोनभद्र । विकास के नाम पर जनता को परेशानी के भंवर में धकेलने का एक और मामला सामने आया है। जोगियाबीर महाल रेलवे क्रॉसिंग पर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण कार्य शुरू होते ही प्रशासन ने रॉबर्ट्सगंज-खलियारी मुख्य मार्ग पर बैरिकेडिंग लगाकर आवागमन बंद कर दिया। हालांकि भविष्य में यह परियोजना जिले के लिए बड़ी सौगात साबित होगी, लेकिन फिलहाल इसके कारण लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने जा रही है। अचानक रास्ता बंद होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई और कई लोगों ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल पूछा कि आखिर बिना समुचित वैकल्पिक मार्ग तैयार किए मुख्य सड़क को बंद करने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई?
राहत से ज्यादा आफत बना आरओबी निर्माण -
प्रशासन द्वारा जारी रूट डायवर्जन लोगों के लिए किसी राहत से ज्यादा परेशानी का कारण बनता नजर आ रहा है। डायवर्जन मार्ग की दूरी इतनी अधिक है कि नगवां, चतरा ब्लॉक और बिहार सीमा से जुड़े क्षेत्रों के लोगों को रॉबर्ट्सगंज पहुंचने के लिए कई किलोमीटर अतिरिक्त सफर तय करना पड़ेगा। इसका सीधा असर न केवल लोगों के समय पर पड़ेगा बल्कि उनकी जेब पर भी भारी आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
हर दिन बढ़ेगा पेट्रोल-डीजल का खर्च -
स्थानीय लोगों का कहना है कि हजारों कर्मचारी, छात्र, व्यापारी, किसान और मरीज रोजाना इस मार्ग का उपयोग करते हैं। अब उन्हें लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुंचना होगा। इससे पेट्रोल और डीजल की खपत बढ़ेगी, वाहन किराया बढ़ेगा और आम लोगों का मासिक खर्च भी बढ़ जाएगा। ऐसे समय में जब पहले से ही महंगाई लोगों की कमर तोड़ रही है, प्रशासन का यह निर्णय लोगों के लिए दोहरी मार साबित हो सकता है।
'पहले रास्ता, फिर निर्माण' की मांग हुई अनसुनी -
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आरओबी निर्माण का स्वागत है, लेकिन जनता को राहत देने की कोई ठोस व्यवस्था किए बिना मुख्य मार्ग बंद कर देना प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है। लोगों का आरोप है कि रेलवे और जिला प्रशासन को पहले वैकल्पिक मार्ग तैयार करना चाहिए था, उसके बाद निर्माण कार्य शुरू करना चाहिए था।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि आने वाले महीनों में स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, किसानों, व्यापारियों और दैनिक यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ेगी। बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।
बरसात में और बढ़ सकती हैं मुश्किलें -
स्थानीय लोगों को आशंका है कि बरसात के मौसम में डायवर्जन मार्ग की स्थिति और खराब हो सकती है। ऐसे में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने और किसानों को बाजार तक फसल पहुंचाने में अतिरिक्त दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
जनता पूछ रही, क्या विकास का मतलब सिर्फ परेशानी?
लोगों का कहना है कि प्रशासन ने होर्डिंग लगाकर रूट डायवर्जन की जानकारी तो दे दी, लेकिन लोगों की वास्तविक समस्या का समाधान नहीं किया। सवाल यह है कि जब परियोजना लंबे समय से प्रस्तावित थी तो वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था पहले क्यों नहीं बनाई गई?
वहीं रेलवे निर्माण प्रबंधन के प्रोजेक्ट मैनेजर देवेश कुमार के अनुसार, "चुनार-चोपन रेलवे लाइन के दोहरीकरण कार्य के तहत जोगियाबीर महाल रेलवे क्रॉसिंग पर आरओबी का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद आवागमन सुगम होगा, लेकिन फिलहाल जनता को कई महीनों तक भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।"




