Sonbhadra News :.....आखिर मौत के सौदागरों पर क्यों मेहरबान है स्वास्थ्य विभाग, हेल्थ डिपार्टमेंट की चुप्पी ने खड़े किए कई सवाल
उरमौरा स्थित कथित अवैध सिंह हेल्थ केयर में जच्चा और नवजात की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है। एक ओर प्रसूता और मासूम की जान चली गई, दूसरी ओर घटना के दूसरे दिन भी......

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8:40 PM, July 12, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । उरमौरा स्थित कथित अवैध सिंह हेल्थ केयर में जच्चा और नवजात की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है। एक ओर प्रसूता और मासूम की जान चली गई, दूसरी ओर घटना के दूसरे दिन भी विभाग अस्पताल संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर तक नहीं दे सका। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर दो-दो मौतों के बाद भी कार्रवाई में इतनी ढिलाई क्यों बरती जा रही है और किसके संरक्षण में यह अवैध अस्पताल संचालित हो रहा था?
'सामान्य प्रसव' का झांसा, फिर मौत का मातम -
पन्नूगंज थाना क्षेत्र के बेलखुरी निवासी मृतका के पति राजेश कुमार ने कोतवाली में तहरीर देकर आरोप लगाया है कि अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी लगातार सामान्य प्रसव कराने का भरोसा देते रहे। जब प्रसूता की हालत बिगड़ती गई, तब भी उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह नहीं दी गई। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार मरीज को रेफर करने की बात कही, लेकिन हर बार सब कुछ सामान्य होने का भरोसा दिया जाता रहा। अंततः ऑपरेशन के दौरान पहले नवजात की मौत हो गई और कुछ देर बाद प्रसूता की हालत भी गंभीर हो गई।
वाराणसी पहुंचते ही डॉक्टरों ने कहा : पहले ही हो चुकी थी मौत -
परिजनों के मुताबिक अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में महिला को एंबुलेंस से वाराणसी भेज दिया। आरोप है कि अस्पताल का एक कर्मचारी भी साथ गया, लेकिन वाराणसी पहुंचने के बाद वह चुपचाप वहां से निकल गया। डाफी स्थित अस्पताल में चिकित्सकों ने महिला को देखते ही मृत घोषित कर दिया और बताया कि उसकी मौत पहले ही हो चुकी थी। जब परिजन वापस सिंह हेल्थ केयर पहुंचे तो अस्पताल पर ताला लटका मिला।
मेडिकल कॉलेज के बाहर सक्रिय है दलालों का नेटवर्क -
मृतका के परिजनों का आरोप है कि नौ जुलाई को मेडिकल कॉलेज में जांच कराने के बाद जैसे ही वे बाहर निकले, कुछ दलालों ने उन्हें घेर लिया और कम खर्च में सामान्य प्रसव कराने का झांसा देकर सिंह हेल्थ केयर पहुंचा दिया। यदि यह आरोप सही है तो यह केवल एक अस्पताल की लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों के बाहर सक्रिय दलालों के संगठित नेटवर्क की ओर भी इशारा करता है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अवैध अस्पताल में कहां से आया ब्लड -
मामले का सबसे अहम और चौंकाने वाला सवाल ब्लड की उपलब्धता को लेकर उठ रहा है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने एक-एक यूनिट ब्लड के नाम पर दो बार 6-6 हजार रुपये, यानी कुल 12 हजार रुपये वसूले। अब सवाल यह है कि यदि सिंह हेल्थ केयर अवैध रूप से संचालित हो रहा था तो उसे रक्त किस लाइसेंसी ब्लड बैंक से मिला? क्या किसी ब्लड बैंक ने नियमों को ताक पर रखकर रक्त उपलब्ध कराया? या फिर कहीं रक्त की अवैध खरीद-फरोख्त का खेल चल रहा है? इस पूरे मामले में ब्लड बैंक से लेकर रक्त निर्गमन के रिकॉर्ड तक की गहन जांच की मांग उठने लगी है।
एफआईआर में देरी ने बढ़ाए संदेह -
पुलिस ने मृतका के पति की तहरीर के आधार पर स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल की जांच रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है लेकिन विभाग की ओर से अब तक एफआईआर के लिए औपचारिक तहरीर न दिए जाने से कार्यवाही पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब दो लोगों की मौत हो चुकी है तो विभाग आखिर किस बात का इंतजार कर रहा है?




