Sonbhadra News : मेडिकल कॉलेज में ‘कागज’ खत्म तो व्यवस्था हुई बेपटरी
एक मशहूर कहावत है 'नाम बड़े और दर्शन छोटे' यही हाल इन दिनों मौजूदा सरकार में देखने को मिल रहा है। सरकार और उनके मंत्री स्वास्थ्य विभाग को लेकर बड़े बड़े दावे करते हैं, जिसकी आज उस वक्त हवा निकल गयी..

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10:41 PM, September 8, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• पर्ची-रिपोर्ट के लिए घंटों कतार में तड़पते रहे मरीज
सोनभद्र । एक मशहूर कहावत है 'नाम बड़े और दर्शन छोटे' यही हाल इन दिनों मौजूदा सरकार में देखने को मिल रहा है। सरकार और उनके मंत्री स्वास्थ्य विभाग को लेकर बड़े बड़े दावे करते हैं, जिसकी आज उस वक्त हवा निकल गयी जब सोनभद्र के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में रजिस्ट्रेशन पर्ची और जांच रिपोर्ट छापने के लिए कागज ही खत्म हो गया। कागज खत्म हुआ तो काउंटर की रफ्तार भी थम गई और देखते ही देखते मरीजों की लंबी कतारें लग गईं। दूर-दराज से इलाज की आस में पहुंचे बीमार मरीज घंटों खड़े रहे, लेकिन उन्हें यह तक स्पष्ट नहीं हो सका कि पर्ची कब बनेगी और रिपोर्ट कब मिलेगी।
यह स्थिति महज कागज की कमी नहीं, बल्कि अस्पताल की बुनियादी व्यवस्थाओं की निगरानी पर बड़ा सवाल है। सवाल यह भी है कि रोजाना सैकड़ों मरीजों का दबाव झेलने वाले मेडिकल कॉलेज में रजिस्ट्रेशन और जांच रिपोर्ट के लिए आवश्यक कागज का स्टॉक समय रहते क्यों नहीं देखा गया?
कागज गायब, काउंटर की व्यवस्था हुई धड़ाम -
आज सुबह पुरुष और महिला रजिस्ट्रेशन काउंटर तथा रिपोर्ट वितरण केंद्र पर मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग पर्ची और रिपोर्ट के लिए कतार में लगे थे, लेकिन प्रिंटिंग पेपर की कमी के चलते काम पहले धीमा हुआ और बाद में कई काउंटरों पर व्यवस्था लगभग ठप हो गई।
बीमार मरीजों के लिए घंटों लाइन में खड़े रहना किसी सजा से कम नहीं था। तीमारदार कभी काउंटर पर जानकारी लेने पहुंचते तो कभी कर्मचारियों से व्यवस्था शुरू होने का इंतजार करते रहे। इलाज की पहली सीढ़ी यानी रजिस्ट्रेशन पर्ची ही अटक गई तो डॉक्टर तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई।
जानें मरीज और तीमारदारों ने क्या बोला -
मरीज आर0एन0 त्रिपाठी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि स्वशासी मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिलने के बावजूद यदि अस्पताल में पर्ची और जांच रिपोर्ट छापने के लिए कागज तक उपलब्ध नहीं है, तो यह व्यवस्था की गंभीर लापरवाही है। मरीजों को इलाज के बजाय लाइन और अव्यवस्था से जूझना पड़ रहा है।
मरीज सोनम चंद्रवंशी और दिव्या ने बताया कि वे सुबह तड़के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से इलाज के लिए पहुंची थीं। घंटों इंतजार करने के बावजूद पर्ची और रिपोर्ट नहीं मिल सकी। बीमारी की हालत में इतनी देर तक लाइन में खड़े रहने से उनकी परेशानी और बढ़ गई।
मरीजों के तीमारदार सोमारी, घरहु और अरुण ने आरोप लगाया कि काउंटर पर मौजूद कर्मचारियों की ओर से भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा था। मरीजों के मुताबिक पर्ची न बनने से डॉक्टर को दिखाना तक मुश्किल हो गया।
कागज की कमी ने खोल दी ‘व्यवस्था’ की पोल -
मेडिकल कॉलेज में कागज जैसी सामान्य और अनिवार्य सामग्री की कमी ने अस्पताल प्रशासन की स्टॉक व्यवस्था, निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि अस्पताल में प्रतिदिन मरीजों की संख्या और कागज की खपत का रिकॉर्ड मौजूद है, तो फिर स्टॉक खत्म होने से पहले उसकी व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
बहरहाल जिस तरह से आज पेपर खत्म होने की वजह से कामकाज ठप हुआ उससे एक बात तो साफ हो गयी कि मेडिकल प्रशासन कितनी सजग व गंभीर है। ऐसे में यही कहा जा सकता है कि योगी सरकार ने विधानसभा के अंदर पेपर लेस किया तो सोनभद्र मेडिकल प्रशासन ने अपने यहाँ पेपर ही खत्म कर दिया।




