आज पुलिस लाइन सभागार में एसपी अभिषेक कुमार वर्मा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि "नोडल अपर पुलिस अधीक्षक मुख्यालय अनिल कुमार एवं क्षेत्राधिकारी साइबर रणधीर मिश्रा के पर्यवेक्षण में की गई विवेचना के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि फ्राड की गई धनराशि महेन्द्र सिंह के कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के वैलेट में ट्रांसफर की गई थी। जांच में पाया गया कि सीएससी संचालक के अनुपस्थित रहने पर अभियुक्त अरुण कुमार एवं सतीश कुमार द्वारा यूजर आईडी व पासवर्ड का दुरुपयोग करते हुए अपने साथी कोलकाता निवासी शुभम जायरो के माध्यम से साइबर फ्राड की धनराशि मंगाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि उक्त वैलेट में कुल ₹11,40,000/- की साइबर फ्राड की गई धनराशि मंगाई गई थी, जिसमें से अभियुक्तों की निशानदेही पर ₹8,40,000/- की धनराशि बरामद की गई है। आईडी ब्लॉक किए जाने की सूचना के बावजूद धन निकासी होने के कारण जिला समन्वयक की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। विवेचना उपरांत अभियोग में धारा 317(2), 317(5) बीएनएस की बढ़ोत्तरी की गई। उक्त प्रकरण में अभियुक्तों अरुण कुमार एवं सतीश कुमार को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार अभियुक्त सतीश कुमार साइबर हैकर गिरोह से जुड़ा हुआ पाया गया, जिसके माध्यम से सीएससी में साइबर फ्राड का पैसा मंगाया जाता था। गिरफ्तार अभियुक्तों में अरुण कुमार डाक विभाग में संविदा पर कार्यरत हैं, जबकि सतीश कुमार CSC संचालक है, जो साइबर हैकर गिरोह से संपर्क में रहकर फ्रॉड की धनराशि मंगवाने का कार्य करता था ।