Sonbhadra News : ढिबरी युग में जीने को विवश ग्रामीणों ने बिजली की मांग को लेकर किया प्रदर्शन
21वीं सदी में भले ही भारत विकास की नई-नई इबादत लिख रहा हो लेकिन जनपद सोनभद्र के एक गाँव के निवासी आज भी ढिबरी युग में जीने क़ो विवश हैं। हम बात कर रहे हैं विकास खण्ड चोपन क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम....

बिजली कनेक्शन की मांग क़ो लेकर प्रदर्शन करते ग्रामीण
sonbhadra
10:28 PM, December 7, 2024
मंटू शर्मा (संवाददाता)
डाला । 21वीं सदी में भले ही भारत विकास की नई-नई इबादत लिख रहा हो लेकिन जनपद सोनभद्र के एक गाँव के निवासी आज भी ढिबरी युग में जीने क़ो विवश हैं। हम बात कर रहे हैं विकास खण्ड चोपन क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत कोटा के टोला कजरहट की जहाँ आज भी ग्रामीणों की आँखें बिजली के इंतजार में पथरा गयी हैं। इससे क्षुब्ध ग्रामीणों ने आज बिजली की मांग क़ो लेकर प्रदर्शन किया।
प्रदेश सरकार भले ही सौभाग्य योजना के तहत घर घर क़ो बिजली देने का दावा कर रही हो लेकिन ग्राम पंचायत कोटा के कजरहट टोला के निवासियों के लिए यह दावा हवाहवाई ही है। आज बढ़ी संख्या में ग्रामीणों ने डाला चुड़ी गली से कोटा के संपर्क मार्ग विरोध प्रदर्शन करते हुए गाँव में कनेक्शन देने की मांग की।
वहीं ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत कोटा के टोला कजरहट , खटखर, पचूडीह लगभग 300 से 500 घर आबाद है जो आजादी के बाद से 2024 बितने को है लेकिन आज भी स्थानीय लोग ढिबरी युग में जीने के लिए विवश है। अभी तक गांव में बिजली नहीं पहुंचने से लोग समस्या से जूझ रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि डाला बाजार से महज एक किलोमीटर दूरी पर कजरहट अत्यधिक पिछड़ा पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है जहा इस टोला के चारों तरफ बिजली के खम्भों पर बल्ब जगमगाते हुए दिखाई देते और इस गांव में अंधेरा रहता है जिसको लेकर हम सभी ग्रामीणों ने पुर्व में कई बार संबंधित विभाग व जिलाधिकारी को अवगत कराया जा चुका है लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई हम सभी के बच्चों को रात में पढ़ाई लिखाई में बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। रात में खाना बनाने के साथ परवरिश में दिक्कत होती है। वहीं पीढी दर पीढी के बुजुर्गो ने अंधेरे में बिता दिए लेकिन घर में बिजली के जलते हुए एक बल्ब को नहीं देख पाए।
इस दौरान विनोद पाठक, नागेन्द्र पासवान, सुधीर पाठक उर्फ मोनू पाठक, उमेश यादव, बुल्लू यादव, लालजी, शिव शंकर, अक्षय यादव, शिव प्रसाद, राजेश यादव, लहरी यादव, रामप्रसाद यादव, मोनू, दुखी यादव, अमरेश यादव, अखिलेश यादव, दिनेश, रोशन, केशव, सुरेश, खुशी राम यादव, विद्यावती देवी, बसंती देवी, ललिता देवी, किस्मतिया देवी, बिदावती देवी, बैजयंती देवी, तीशा देवी, मिना देवी, निशा कुमारी, फूलकुमारी आदि ग्रामीण मौजुद रहे।




