किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने आंदोलन को संबोधित करते हुए कहा कि "एक ओर वह वर्षों से "पेड़ है तो प्राण है" अभियान चला रहे हैं और देश के प्रधानमंत्री "एक पेड़ मां के नाम" का संदेश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सोनभद्र के जंगलों और पहाड़ों में हजारों पेड़ों की बलि देकर परियोजनाओं का रास्ता तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की बातें करने वाली व्यवस्था आखिर किस विकास मॉडल को आगे बढ़ाना चाहती है, जहां जंगल बचाने की जगह उन्हें खत्म करने की तैयारी हो रही है।उन्होंने दावा किया कि जिले में विभिन्न निजी कंपनियों द्वारा प्रस्तावित पीएसपी परियोजनाओं के लिए कुल 3,147 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। इनमें ग्रीनको 700 हेक्टेयर, जेएसडब्ल्यू 575 हेक्टेयर, अडानी 237 हेक्टेयर, अबादा 275 हेक्टेयर, अमुनोरा 337 हेक्टेयर, टोरेंट 725 हेक्टेयर और टीएचडीसी 301 हेक्टेयर जैसी कंपनियां शामिल हैं। उनका आरोप था कि इन परियोजनाओं की कीमत आदिवासी, किसान और ग्रामीण अपने घर, खेत और जंगल खोकर चुकाएंगे, जबकि लाभ कॉरपोरेट घरानों को मिलेगा।"