Sonbhadra News : जल, जंगल और जमीन पर 'कॉरपोरेट कब्जे' के खिलाफ आदिवासियों का रणघोष
रॉबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र के पपड़ाहवा, पल्हारी और चेरुई गांवों में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना के विरोध में गुरुवार को आदिवासी समाज का आक्रोश खुलकर सामने आया। किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के......

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sonbhadra
4:34 PM, June 25, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• पपड़ाहवा-पल्हारी और चेरुई में ग्रामीणों का प्रदर्शन
• संदीप मिश्रा बोले- आदिवासियों की सहमति के बिना नहीं लगने देंगे उद्योग
सोनभद्र । रॉबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र के पपड़ाहवा, पल्हारी और चेरुई गांवों में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना के विरोध में गुरुवार को आदिवासी समाज का आक्रोश खुलकर सामने आया। किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुषों ने प्रदर्शन कर कंपनी स्थापना का विरोध जताया और जल, जंगल तथा जमीन की रक्षा का संकल्प दोहराया।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा, स्वच्छ पर्यावरण और आदिवासी संस्कृति से है। ऐसे में औद्योगिक परियोजनाएं स्थानीय पर्यावरण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए भी खतरा बन सकती हैं।
बीडीसी सदस्य बिंदु अगरिया ने कहा कि "किसी भी कीमत पर गांव में कंपनी नहीं लगने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सोनभद्र का यह इलाका आज भी स्वच्छ वातावरण और प्राकृतिक संसाधनों के कारण विशेष पहचान रखता है। यदि यहां बड़े उद्योग स्थापित किए गए तो पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा और इसका सीधा असर ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जीवन पर पड़ेगा।"
ग्रामीण नेता रामबहाल खरवार ने कहा कि "आदिवासी समाज अपनी जमीन और संसाधनों की रक्षा के लिए अंतिम दम तक संघर्ष करेगा। उन्होंने कहा कि उद्योगों के नाम पर स्थानीय लोगों की जमीन छीनी जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।"
ग्रामीणों ने रोजगार के दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिले में पहले से संचालित कई बड़े उद्योग स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार देने में विफल रहे हैं। ऐसे में नई परियोजनाओं से भी क्षेत्रीय युवाओं को कोई विशेष लाभ मिलने की उम्मीद नहीं है।
किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्रा ने कहा कि "यह केवल एक कंपनी का मुद्दा नहीं, बल्कि आदिवासियों के अस्तित्व, अधिकार और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा का सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने में लगी है, जबकि मूल निवासियों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आदिवासियों की सहमति के बिना कंपनी स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई तो क्षेत्र में व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष हर स्तर पर जारी रहेगा।"
इस दौरान प्रमिला बरमतिया, पुष्पा खरवार, पिंकी अगरिया, रजावती गोंड़, विन्दू अगरिया, सुदामा चेरो, दिनेश गोंड़, रामबहाल खरवार, गुलाब गोंड़, शत्रुधन बिंद, विजय बिंद, संजय बियार सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।




