Sonbhadra News : जंगल बचाने को हजारों आदिवासी एकजुट, कंपनी स्थापना के खिलाफ सीएम को ज्ञापन भेज आंदोलन का ऐलान
जिले में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना को लेकर जंगल, जमीन और पर्यावरण की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में हजारों आदिवासी महिला-पुरुषों ने वन.....

किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते आदिवासी......
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6:00 PM, June 30, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना को लेकर जंगल, जमीन और पर्यावरण की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में हजारों आदिवासी महिला-पुरुषों ने वन क्षेत्र में कथित पेड़ों की कटान और कंपनी स्थापना के विरोध में खुलकर मोर्चा खोल दिया। संगठन के संयोजक संदीप मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम विस्तृत ज्ञापन भेजकर वन विभाग के अधिकारियों पर शासनादेश की अनदेखी, नियमों के विपरीत एनओसी जारी करने और बड़े पैमाने पर हरित संपदा को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
संदीप मिश्रा ने कहा कि "आदिवासी केवल जंगल में नहीं रहते, बल्कि जंगल ही उनकी संस्कृति, आस्था और अस्तित्व है। आदिवासी अनादर नहीं, बल्कि आस्था के विषय हैं। उनके जल, जंगल और जमीन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
शासनादेश की अनदेखी का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग -
ज्ञापन में वर्ष 2024 के शासनादेश का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि पेड़ों की कटान के लिए निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जा रहा। संरक्षित पेड़ों तक को काटने की अनुमति दी जा रही है और जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय कथित रूप से उदासीन बने हुए हैं। मोर्चा ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा अवैध कटान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
जंगल हमारी विरासत, कंपनी किसी कीमत पर नहीं -
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने भी कंपनी स्थापना का पुरजोर विरोध किया। ग्रामीणों का कहना था कि उद्योग आने से क्षेत्र का पर्यावरण प्रभावित होगा और आदिवासियों के पारंपरिक अधिकार समाप्त हो जाएंगे।
कन्हैया चेरो ने कहा कि "किसी भी कीमत पर कंपनी नहीं लगने देंगे। जरूरत पड़ी तो जिला मुख्यालय से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक आंदोलन होगा।"
बिंदु अगरिया ने आरोप लगाया कि "कंपनी आने से प्रदूषण फैलेगा और गरीबों के जंगल, जमीन तथा प्राकृतिक अधिकार छिन जाएंगे। इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।"
राम बहाल ने कहा कि "हमारे पूर्वजों की पहचान इन जंगलों से है। जान चली जाएगी, लेकिन जंगल और पेड़ों की बलि नहीं होने देंगे।"
वहीं रामसेवक ने कहा कि "कोरोना काल में इसी क्षेत्र की स्वच्छ हवा और हरियाली ने लोगों को राहत दी थी। आने वाले समय में यही प्राकृतिक संपदा सबसे बड़ी पूंजी साबित होगी।"
ये रहे मौजूद -
कार्यक्रम में विंदू खरवार, गोपीनाथ चेरो, मुखलाल चेरो, गुलाब चेरो, बासमती गोंड, दीपक गोंड, दिनेश माझी, गुलाब बैगा, राजेश पनिका सहित सैकड़ों आदिवासी महिला-पुरुष उपस्थित रहे।




