Sonbhadra News : दिसंबर तक जिले को बाल श्रम मुक्त बनाने की तैयारी, टास्क फोर्स ने बनाई रणनीति
जनपद को बाल श्रम मुक्त बनाने की दिशा में प्रशासन ने अभियान तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला टास्क फोर्स की बैठक...

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8:26 PM, August 11, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जनपद को बाल श्रम मुक्त बनाने की दिशा में प्रशासन ने अभियान तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला टास्क फोर्स की बैठक में बाल एवं किशोर श्रमिकों के प्रभावी चिन्हांकन, रेस्क्यू, पुनर्वासन और बाल श्रम उन्मूलन अभियान में विभिन्न विभागों की सक्रिय सहभागिता को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में सभी संबंधित विभागों को अपने-अपने स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में बताया गया कि श्रम विभाग, उत्तर प्रदेश शासन एवं मुख्यमंत्री की प्राथमिकता के तहत प्रदेश के सभी जनपदों को वर्ष 2027 तक, जबकि आकांक्षी जनपदों सहित 16 जनपदों को वर्ष 2026 तक बाल श्रम मुक्त घोषित किया जाना है। इसी क्रम में सोनभद्र में श्रम विभाग, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी) तथा एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के समन्वय से जागरूकता एवं रेस्क्यू अभियान चलाए जा रहे हैं।
जून-जुलाई में 33 बाल एवं किशोर श्रमिक चिन्हित -
अभियान के तहत जून और जुलाई माह में 33 बाल एवं किशोर श्रमिकों का चिन्हांकन किया गया, जबकि 27 संस्थानों के विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही की गई। बैठक में चिन्हित बच्चों के शैक्षणिक एवं आर्थिक पुनर्वासन के साथ उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में भी चर्चा की गई। जनपद के 10 विकासखंडों की 621 ग्राम पंचायतों, छह नगर पंचायतों और एक नगर पालिका को दिसंबर 2026 तक बाल श्रम मुक्त घोषित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत एवं ब्लॉक स्तर पर गठित बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों तथा शहरी क्षेत्रों में वार्ड स्तर की समितियों के माध्यम से बाल श्रम मुक्त प्रस्ताव पारित कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके बाद जिला स्तरीय समिति द्वारा प्रस्तावों का अनुमोदन किया जाएगा।
बंधुआ श्रमिकों और बेघर बच्चों पर भी रहेगा फोकस -
बैठक में बाल एवं किशोर श्रमिकों के साथ-साथ बंधुआ श्रमिकों के चिन्हांकन, सड़कों पर रहने वाले एवं बेघर बच्चों के बचाव तथा उनके पुनर्वासन के लिए गठित टीमों और नामित नोडल अधिकारियों की भूमिका पर भी जानकारी दी गई। सभी संबंधित विभागों को रेस्क्यू एवं पुनर्वासन अभियान में सक्रिय सहयोग करने के निर्देश दिए गए। श्रम विभाग को विकासखंड अधिकारियों, ग्राम विकास अधिकारियों, पंचायत सचिवों एवं अधिशासी अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर बाल श्रम मुक्त प्रस्ताव पारित कराने के लिए आवश्यक बैठकों का आयोजन कराने पर भी जोर दिया गया।
ये अधिकारीगण रहे मौजूद -
बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक जयराम सिंह, क्षेत्राधिकारी, डिप्टी सीएमओ, डीएलएसए प्रतिनिधि, जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल कल्याण समिति के प्रतिनिधि, पुलिस विभाग, चाइल्ड हेल्पलाइन कोऑर्डिनेटर, जिला कौशल प्रबंधन, विकासखंड अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी के प्रतिनिधि, एएचटी, बीडीओ प्रतिनिधि, श्रम विभाग के अधिकारी एवं एनजीओ प्रतिनिधि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।




