Sonbhadra News : जिले का एक गाँव ऐसा भी... जहाँ नहीं बजती मोबाइल में घंटी
भारत ने चांद पर कदम रख लिया है और मंगल ग्रह पर उतरने के लिए लगातार प्रयासरत है। वहीं देश में एयरफाइबर का दौर चल रहा है, विद्यालयों में ऑनलाइन क्लासेज चल रही हैं लेकिन जनपद सोनभद्र का एक गांव ऐसा भी...

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12:03 AM, November 29, 2025
आनन्द कुमार चौबे/रमेश/राजा (संवाददाता)
सोनभद्र । भारत ने चांद पर कदम रख लिया है और मंगल ग्रह पर उतरने के लिए लगातार प्रयासरत है। वहीं देश में एयरफाइबर का दौर चल रहा है, विद्यालयों में ऑनलाइन क्लासेज चल रही हैं लेकिन जनपद सोनभद्र का एक गांव ऐसा भी है, जो आज भी आधुनिकता की इस दौड़ में बहुत ही पीछे दौड़ रहा है। इस गाँव में ग्रामीणों के पास मोबाइल तो है लेकिन ये भी महज बच्चों के गेम खेलने के काम आता है। यदि कहीं बात करनी हो या मरीजों या गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के लिए 102 नंबर एम्बुलेंस बुलाना हो तो 1.5 किलोमीटर की दूरी तय कर पहाड़ी पर जाना पड़ता है तब कहीं जाकर मोबाइल में नेटवर्क आता है और बात हो पाती है।
नेटवर्क मिलते ही लगता है हो गई भगवान से भेंट -
भारत आज भले ही इंटरनेट खपत के मामले में विश्वगुरु है, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत का दूसरा पहलू कुछ और ही है। देश के अति पिछड़े जिलों में शामिल जनपद सोनभद्र के विकास खंड बभनी में जंगल में बसे एक ऐसे गांव से आपको रूबरू करवाते हैं जहां इस आधुनिक युग में भी मोबाइल काम नहीं करता है। जिला मुख्यालय सोनभद्र से लगभग 100 किमी दूर विकास खंड बभनी के जंगलों में बसा है गोहड़ा गांव। यह गाँव छत्तीसगढ़ और झारखण्ड का सीमावर्ती गाँव भी है। ग्रामीण बताते हैं कि गांव की कुल आबादी लगभग 4 हजार है। दुद्धी से 35 किमी दूर जगल में बसे इस गांव के लोगों की जिंदगी अब भी प्राचीन काल से कम नहीं है। आज के इस डिजिटल युग मे यहां के लोग सड़क, पानी और भी कई मूलभूत सुविधाओं के आभाव में अपनी जिंदगी का गुजारा करते हैं। गांव वालों ने किसी तरह मेहनत मजदूरी कर मोबाइल तो खरीद लिया, लेकिन उन्हें बात करने के लिए गांव से 1.5 किमी दूर पहाड़ियों पर चढ़कर मोबाइल नेटवर्क का इंतजार करना होता है। यदि किसी के फोन में नेटवर्क दिख जाए तो ऐसा लगता है जैसे उसकी भगवान से भेंट हो गई।
गंभीर बीमारी या इमरजेंसी होने पर सुबह का करना होता है इंतजार -
सोशल मीडिया और संचार क्रांति के इस दौर में मोबाइल नेटवर्क के अभाव में शासन की ऑनलाइन योजनाओं और सुविधाओं का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा। ग्रामीणों ने बताया कि दिन के समय अगर किसी को बहुत जरूरी बात करनी हो तो या तो दूसरे गाँव जाना पड़ता है या फिर 1.5 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर जाना पड़ता है। रात के समय कोई इमरजेंसी होने पर सुबह का इंतजार करना पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत बीमार और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए 102/108 नंबर एंबुलेंस बुलाने में आती है। ऑनलाइन कक्षाओं से तो यह बच्चे कोसों दूर हैं। जिस कारण शिक्षा का स्तर भी यहां गिरते जा रहा है।




