Sonbhadra News : नवरात्रि के प्रथम दिन कलश यात्रा के साथ नौ दिवसीय पूजन- अर्चन प्रारम्भ
कलश यात्रा के साथ मां दुर्गा की पूजन-अर्चन प्रारम्भ

सोनभद्र
7:45 PM, October 3, 2024
धर्मेन्द्र गुप्ता(संवाददाता)
विंढमगंज(सोनभद्र)। थाना क्षेत्र अंतर्गत मंदिरों, प्रमुख स्थानों पर कलश स्थापना के साथ नवरात्र महोत्सव शुरू हो गया। विभिन्न स्थानों पर इस महोत्सव की शुरुआत भव्य कलश यात्रा के साथ की गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। नवरात्र के प्रथम दिन लोगों ने मंदिरों में पूजा, अर्चना की। विंढमगंज के हरना कछार में मलेश्वर महादेव मंदिर स्थित विशाल दुर्गा पूजन हेतु कलश यात्रा निकाली गई जिसमें सैकड़ो श्रद्धालु मौजूद थे।
वहीं पतरिहा में भी कलश यात्रा के दौरान सिर पर आस्था का कलश, मन में मुरादों झोली लिए महिलायें- पुरुष गाजे-बाजे के साथ यात्रा में शामिल हुए। विद्वान पण्डित आचार्य अमित तिवारी ने विधि विधान से घट स्थापित कराया। वहीं समिति ने बताया कि नौ दिनों तक चलने वाले दुर्गा पूजा में नियमित दुर्गा सप्तसती का पाठ किया जायेगा, ताकि आसपास के क्षेत्र में माता की कृपा बनी रहे। इस मौके पर प्रधान जजमान पुनीत कुमार चौबे,अविनाश चौबे, आलोक चौबे ,प्रभाकर मिश्रा ,राम नरेश पठारी,ग्राम प्रधान प्रतिनिधि बुंदेल चौबे सहित सैकड़ों श्रद्धालु शामिल रहे।
आइए जानते हैं इस दिन की महत्ता-
शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि है। इस दिन कलश स्थापना की जाती है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाती है। मां दुर्गा की पूजा करने से साधक ही हर मनोकामना पूरी होती है। इसके साथ ही घर में सुख एवं समृद्धि आती है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना पर 3 दुर्लभ एवं शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इन योग में जगत की देवी मां दुर्गा की पूजा करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होगी। नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना होती है।
एक मान्यता के अनुसार- मां शैलपुत्री हिमालयराज की पुत्री हैं।देवी शैलपुत्री वृषभ पर सवार हैं। माता ने श्वेत रंग के वस्त्र ही धारण किये हुए हैं। इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प होता है। मां का यह रूप सौम्यता, करुणा, स्नेह और धैर्य को दर्शाता है। मान्यता है कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार मां शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती हैं। मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की आराधना करने से चंद्र दोष से मुक्ति भी मिलती है।




