Sonbhadra News : शिक्षकों के समायोजन में बड़ा 'खेल': कहीं स्कूल खाली, तो कहीं मेहरबानी; ग्राम प्रधान ने खोला मोर्चा
शिक्षकों के समायोजन में बड़ा 'खेल': कहीं स्कूल खाली, तो कहीं मेहरबानी; ग्राम प्रधान ने खोला मोर्चा


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शिक्षकों के समायोजन में बड़ा 'खेल': कहीं स्कूल खाली, तो कहीं मेहरबानी; ग्राम प्रधान ने खोला मोर्चा
अधिकारियों की सांठगांठ से बच्चों का भविष्य दांव पर, बंद होने की कगार पर फुलवार जूनियर हाई स्कूल, जिलाधिकारी से उच्च स्तरीय जांच की मांग
दुद्धी, सोनभद्र। विकास खंड दुद्धी के अंतर्गत ग्राम पंचायत फुलवार के जूनियर हाई स्कूल में शिक्षकों के समायोजन को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक खेल सामने आया है। शासन की मंशा के विपरीत, शिक्षा विभाग के जिम्मेदारों ने बच्चों के भविष्य को ताक पर रखकर चहेते शिक्षकों को उपकृत करने का काम किया है। आलम यह है कि जिस स्कूल में एक भी शिक्षक नहीं है, उसे समायोजन में पूरी तरह ठेंगा दिखा दिया गया, जबकि अन्य रसूखदार स्कूलों पर मेहरबानी बरसाई गई है। इस गंभीर विसंगति को लेकर ग्राम प्रधान दिनेश यादव और पूर्व बी.डी.सी. मुकेश गुप्ता ने मोर्चा खोलते हुए दुद्धी तहसील समाधान की अध्यक्षता कर रहे जिलाधिकारी चर्चित गौड़ को शिकायती पत्र सौंपकर उच्च स्तरीय जाँच की मांग की हैं।
शिकायत पत्र के माध्यम से जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित कराते हुए बताया गया कि ग्राम पंचायत फुलवार के जूनियर हाई स्कूल में लंबे समय से एक भी शिक्षक तैनात नहीं है। इस वजह से गरीब नौनिहालों की पढ़ाई पूरी तरह ठप पड़ी है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर समस्या को लेकर पूर्व में कई बार तहसील दिवस और उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन हर बार फाइलों को दबा दिया गया। अब वर्तमान समायोजन नीति में भी इस बंद पड़े स्कूल के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है।प्रशासनिक मनमानी का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि जहाँ फुलवार का स्कूल शिक्षक विहीन तड़प रहा है, वहीं दूसरी ओर मल्देवा और मुड़ीसेमर जैसे सुगम विद्यालयों में दो-दो शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया छात्रों की संख्या या जरूरत के आधार पर नहीं, बल्कि केवल शिक्षकों की व्यक्तिगत सुविधा और सेटिंग-गेटिंग को देखकर की गई है, जो कि घोर अन्याय की श्रेणी में आता है।उच्च स्तरीय जांच और तत्काल तैनाती की मांगग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि शिक्षा विभाग का यह रवैया पूरी तरह छात्र विरोधी और जनहित के खिलाफ है।इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि फुलवार स्कूल में तत्काल शिक्षकों की नियुक्ति कर पठन-पाठन शुरू नहीं कराया गया, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे
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