Sonbhadra News : हाईवे किनारे की बेशकीमती जमीन पर फर्जी पट्टों का खेल बेनकाब, डीएम ने चारों आवंटन किया निरस्त
रॉबर्ट्सगंज-पन्नूगंज (कलवारी-खलियारी राजमार्ग) के किनारे स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि पर हुए कथित पट्टा घोटाले में जिलाधिकारी चर्चित गौड़ की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चारों .....

sonbhadra
12:56 AM, June 19, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• तहसील प्रशासन को अंधेरे में रखकर बांटी गई सरकारी जमीन, डीएम बोले- तथ्य छिपाकर कराया गया आवंटन
• पट्टाधारकों के प्रभाव में हुई कार्रवाई, ग्राम पंचायत सदस्य ने खुद प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर खुद ही ले लिया पट्टा
सोनभद्र । रॉबर्ट्सगंज-पन्नूगंज (कलवारी-खलियारी राजमार्ग) के किनारे स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि पर हुए कथित पट्टा घोटाले में जिलाधिकारी चर्चित गौड़ की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चारों पट्टों को निरस्त कर दिया है। जांच में सामने आया कि तहसील प्रशासन को गुमराह कर और महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर राजमार्ग से सटी बेशकीमती भूमि का आवंटन कराया गया था। डीएम ने अपने आदेश में कहा कि पट्टाधारकों के प्रभाव में आकर नियमों की अनदेखी की गई और सरकारी भूमि के आवंटन में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं।
मामला रॉबर्ट्सगंज-पन्नूगंज मार्ग के किनारे स्थित लगभग छह बिस्वा सरकारी भूमि का है, जिसकी कीमत बाजार में लाखों रुपये बताई जा रही है। गत जनवरी माह में यह प्रकरण सुर्खियों में आया था। आरोप था कि पात्रता की अनदेखी कर प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सरकारी भूमि का पट्टा आवंटित कर दिया गया।
जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। डीएम न्यायालय ने पाया कि जिन लोगों को पट्टा आवंटित किया गया, उनके पास पहले से पर्याप्त भूमि मौजूद थी, लेकिन इस तथ्य को जानबूझकर छिपाया गया। इतना ही नहीं, जिस जमीन का आवंटन किया गया वह राजमार्ग से सटी अत्यंत महत्वपूर्ण और मूल्यवान भूमि थी, लेकिन इस संबंध में भी वास्तविक स्थिति को रिकॉर्ड में नहीं दर्शाया गया।
सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि जिस ग्राम पंचायत सदस्य ने भूमि आवंटन के प्रस्ताव पर सदस्य के रूप में हस्ताक्षर किए थे, उसे भी पट्टाधारक बना दिया गया। इससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और वैधानिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
मामला उजागर होने के बाद तत्कालीन एसडीएम उत्कर्ष द्विवेदी ने पट्टा निरस्तीकरण के लिए जिलाधिकारी न्यायालय में वाद दाखिल कराया था। साथ ही संबंधित लेखपाल को निलंबित कर दिया गया था तथा कानूनगो के विरुद्ध भी निलंबन की संस्तुति भेजी गई थी। जांच रिपोर्ट में तहसीलदार को भी तथ्यों को छिपाकर गलत आदेश कराने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।
जून माह के प्रथम सप्ताह में मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद जिलाधिकारी ने उपलब्ध अभिलेखों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों के तर्कों का परीक्षण किया। इसके बाद चारों पट्टों को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। साथ ही संबंधित भूमि को पुनः बंजर खाते में दर्ज करने और आवश्यक राजस्व कार्रवाई पूर्ण कराने के लिए उप जिलाधिकारी को निर्देशित किया गया है।
सरकारी जमीन पर कब्जे की साजिश पर चला प्रशासन का बुलडोजर -
मामला उजागर होने के बाद तत्कालीन एसडीएम उत्कर्ष द्विवेदी ने पट्टा निरस्तीकरण के लिए जिलाधिकारी न्यायालय में वाद दाखिल कराया था। साथ ही संबंधित लेखपाल को निलंबित कर दिया गया था तथा कानूनगो के विरुद्ध भी निलंबन की संस्तुति भेजी गई थी। जांच रिपोर्ट में तहसीलदार को भी तथ्यों को छिपाकर गलत आदेश कराने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।
डीएम कोर्ट के इस फैसले को सरकारी भूमि की सुरक्षा और राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता की दिशा में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। हाईवे किनारे की बहुमूल्य भूमि को नियमों की अनदेखी कर निजी हाथों में सौंपने की कोशिश पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी संपत्तियों पर नजर गड़ाने वालों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।




