Sonbhadra News : अवैध अस्पतालों का 'मौत का कारोबार' जारी, फिर झोलाछाप अस्पताल ने ली जच्चा-बच्चा की जान
जिला मुख्यालय पर झोलाछाप और बिना पंजीकरण संचालित निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग की ढिलाई एक बार फिर एक परिवार पर भारी पड़ गई। उरमौरा स्थित कथित रूप से अवैध तरीके से संचालित सिंह हेल्थ केयर में.....

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6:56 PM, July 10, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• जिला अस्पताल के बाहर सक्रिय दलालों के जाल में फंसा परिवार
• ऑपरेशन के बाद जच्चा-बच्चा की मौत, स्वास्थ्य विभाग पर फिर उठे सवाल
• जच्चा-बच्चा की मौत के बाद जागा स्वास्थ्य महकमा
सोनभद्र। जिला मुख्यालय पर झोलाछाप और बिना पंजीकरण संचालित निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग की ढिलाई एक बार फिर एक परिवार पर भारी पड़ गई। उरमौरा स्थित कथित रूप से अवैध तरीके से संचालित सिंह हेल्थ केयर में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही से जच्चा और नवजात दोनों की मौत हो गई। आरोप है कि मौत के बाद अस्पताल संचालक ने मामले को दबाने के लिए प्रसूता को गंभीर हालत बताकर वाराणसी रेफर कर दिया, जबकि वहां पहुंचने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना सामने आते ही अस्पताल का डॉक्टर और पूरा स्टाफ अस्पताल बंद कर मौके से फरार हो गया।
जानकारी के अनुसार पन्नूगंज थाना क्षेत्र के बेलखुरी गांव निवासी राजेश अपनी पत्नी मीना देवी (32 वर्ष) को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार जिला अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद बाहर मौजूद कथित दलालों ने उन्हें बहला-फुसलाकर उरमौरा स्थित सिंह हेल्थ केयर पहुंचा दिया। यहां ऑपरेशन के बाद मृत शिशु पैदा हुआ और कुछ ही देर में प्रसूता की हालत भी बिगड़ गई। इसके बाद अस्पताल संचालक ने आनन-फानन में वाराणसी रेफर कर दिया, जहां चिकित्सकों ने मीना देवी को मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही मृतका के मायके और ससुराल पक्ष के लोग अस्पताल पहुंच गए, लेकिन उससे पहले ही अस्पताल का डॉक्टर और स्टाफ ताला लगाकर फरार हो चुका था। स्थिति को देखते हुए मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया। सूचना पर पहुंचे निजी अस्पताल पंजीयन के नोडल अधिकारी डॉ. गुलाब शंकर यादव ने अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की।
दलालों ने फंसाया, अस्पताल वालों ने हमारी बहू की जान ले ली -
मृतका के भसुर रमेश ने आरोप लगाया कि "जिला अस्पताल के बाहर सक्रिय दलालों ने झांसा देकर उनकी बहू को सिंह हेल्थ केयर में भर्ती कराया। उन्होंने कहा, "अगर जिला अस्पताल से सीधे किसी मान्यता प्राप्त अस्पताल भेजा जाता तो शायद आज मेरी बहू और बच्चा जिंदा होते। अस्पताल वालों ने लापरवाही की और मौत होने के बाद वाराणसी रेफर कर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की। दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।"
स्वास्थ्य विभाग पर फिर उठे सवाल -
यह घटना एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। शासन के लगातार निर्देशों के बावजूद जिला मुख्यालय पर कथित रूप से बिना मानकों और बिना वैध अनुमति के कई निजी अस्पताल धड़ल्ले से संचालित होने की शिकायतें लंबे समय से उठती रही हैं। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होने से मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब तक अवैध अस्पतालों और जिला अस्पताल के बाहर सक्रिय दलालों के नेटवर्क पर सख्ती नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं।
वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने बताया कि "सिंह हेल्थ केयर अवैध तरीके से संचालित किया जा रहा था, जिसमें जच्चा-बच्चा की मौत के बाद हॉस्पिटल को सीज करते हुए संचालक के खिलाफ FIR दर्ज करा अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रहीं है।"




