Sonbhadra News : लेखपाल-कानूनगो की मनमानी पर तकनीकी शिकंजा, अब रोवर मशीन से मिलेगा सटीक सीमांकन
जनपद में वर्षों से चले आ रहे भूमि विवाद, गलत पैमाइश, सीमांकन को लेकर होने वाले झगड़े और राजस्व कर्मियों पर लगने वाले मनमानी के आरोपों पर अब तकनीक की सख्त निगरानी होने जा रही है। भूमि विवादों से......

AI जनरेटेड बैनर......
sonbhadra
4:58 PM, June 30, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• भूमि विवादों से जूझ रहे सोनभद्र को बड़ी राहत
• 1 जुलाई से 15 अगस्त तक जिले के चारों तहसीलों में चलेगा विशेष अभियान
• प्रत्येक तहसील में प्रतिदिन 5-5 गांवों में होगा कार्य
सोनभद्र । जनपद में वर्षों से चले आ रहे भूमि विवाद, गलत पैमाइश, सीमांकन को लेकर होने वाले झगड़े और राजस्व कर्मियों पर लगने वाले मनमानी के आरोपों पर अब तकनीक की सख्त निगरानी होने जा रही है। भूमि विवादों से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में शामिल सोनभद्र में 1 जुलाई से 15 अगस्त तक विशेष रोवर (GNSS) पैमाइश अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान जिले की चारों तहसीलों में अत्याधुनिक जीपीएस आधारित रोवर तकनीक से जमीन की पैमाइश की जाएगी, जिससे सीमांकन पूरी तरह सटीक और पारदर्शी होगा।
उभ्भा जैसे विवादों के बाद अब सरकार ने जताया तकनीक पर भरोसा -
सोनभद्र भूमि विवादों के कारण कई बार राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा है। उभ्भा जैसी दर्दनाक घटना ने यह साबित कर दिया था कि वर्षों से लंबित सीमांकन और गलत पैमाइश कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। आज भी तहसील दिवस, थाना समाधान दिवस और जनसुनवाई में सबसे अधिक शिकायतें जमीन और सीमांकन से जुड़ी ही पहुंचती हैं। ऐसे में सरकार का यह अभियान जिले के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब मशीन बताएगी जमीन की सही हकीकत -
प्रदेश सरकार ने भूमि पैमाइश को पूरी तरह आधुनिक तकनीक से जोड़ने का निर्णय लिया है। अब सर्वे ऑफ इंडिया के सैटेलाइट डेटा से जुड़ी GNSS रोवर मशीन के माध्यम से खेत और भूखंड की पैमाइश की जाएगी। इस तकनीक से लगभग 5 सेंटीमीटर तक की सटीकता के साथ जमीन का क्षेत्रफल और वास्तविक स्थिति निर्धारित होगी। इससे वर्षों से चले आ रहे सीमांकन विवादों पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद है।
लेखपाल-कानूनगो की मनमानी पर लगेगी तकनीकी लगाम -
अब तक पैमाइश को लेकर अक्सर पक्षपात, देरी और गलत नाप-जोख के आरोप सामने आते रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पैमाइश पूरी तरह तकनीक आधारित होगी, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना बेहद कम रह जाएगी। राजस्व विभाग का मानना है कि इससे भूमि विवादों में कमी आएगी और मुकदमेबाजी भी घटेगी।
हर तहसील में उपलब्ध रहेगा रोवर -
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि "प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप जनपद में भूमि विवादों का समयबद्ध, निष्पक्ष और पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से 01 जुलाई से 15 अगस्त, 2026 तक सभी तहसीलों में जीएनएसएस (GNSS) रोवर तकनीक के माध्यम से विशेष पैमाइश अभियान संचालित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक तहसील में गठित रोवर टीम प्रतिदिन 5-5 गांवों में पहुंचकर धारा-24 के लंबित वादों की पैमाइश करेगी, जिससे वर्षों से लंबित भूमि विवादों के निस्तारण में तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि जनपद में वर्तमान में धारा-24 के 253 वाद लंबित हैं, जिन्हें अभियान अवधि में प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने सभी उपजिलाधिकारियों, तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों एवं लेखपालों को निर्देश दिए हैं कि पैमाइश कार्य पूरी पारदर्शिता, गुणवत्ता और राजस्व परिषद की गाइडलाइन के अनुरूप किया जाए। साथ ही प्रत्येक पैमाइश की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी एवं दैनिक प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए।"
सीमा स्तंभ पर नहीं रहेगा निर्भरता -
उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब जमीन की पैमाइश के लिए पारंपरिक सीमा स्तंभ (पिलर) पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सैटेलाइट आधारित तकनीक से बिना स्थायी प्वाइंट के भी भूमि की वास्तविक स्थिति और क्षेत्रफल का सटीक निर्धारण किया जा सकेगा।
डीएम ने की अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील -
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने जनपदवासियों से अपील किया है कि जिनकी भूमि का सीमांकन या पैमाइश लंबित है, वे इस विशेष अभियान का अधिकतम लाभ उठाएं। सही पैमाइश से न केवल विवाद कम होंगे, बल्कि राजस्व अभिलेख भी वास्तविक स्थिति के अनुरूप अपडेट हो सकेंगे।




