Sonbhadra News : टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों ने भरी हुंकार, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के बैनर तले गुरुवार को शिक्षकों ने जिलाध्यक्ष अशोक कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट परिसर में...

टीईटी अनिवार्यता के विरुद्ध कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते शिक्षकगण.....
sonbhadra
8:29 PM, June 18, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश के बैनर तले गुरुवार को शिक्षकों ने जिलाध्यक्ष अशोक कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपते हुए वर्षों पूर्व नियुक्त शिक्षकों के हितों की रक्षा हेतु तत्काल नीतिगत समाधान की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कहा कि "टीईटी लागू होने से पहले प्रदेश सहित देशभर में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियां तत्कालीन नियमों और निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत विधिवत रूप से की गई थीं। ऐसे में बाद में लागू किए गए पात्रता मानकों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना प्राकृतिक न्याय और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के विपरीत है।"
महासंघ के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार त्रिपाठी ने कहा कि "वर्तमान समय में प्रदेश के लाखों शिक्षकों में गहरी चिंता, असुरक्षा और असंतोष का माहौल है। उन्होंने कहा कि भारतीय विधिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि कोई भी नियम या अधिसूचना सामान्यतः उसके लागू होने की तिथि से प्रभावी होती है। पूर्व में वैध रूप से हुई नियुक्तियों को बाद की शर्तों के आधार पर प्रभावित करना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।उन्होंने कहा कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा टीईटी को न्यूनतम योग्यता के रूप में अधिसूचित किया गया था। इससे पहले नियुक्त हुए शिक्षकों ने वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, राष्ट्र निर्माण, सामाजिक चेतना और चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे शिक्षकों के अधिकारों और सेवा सुरक्षा को लेकर सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। शिक्षकों ने सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय का सम्मान करते हुए कहा कि न्यायालय द्वारा कानून की व्याख्या की जाती है, लेकिन जनहित में आवश्यक नीतिगत एवं विधायी समाधान उपलब्ध कराना सरकार और संसद का अधिकार क्षेत्र है। इसलिए केंद्र सरकार को हस्तक्षेप कर शिक्षकों के हित में ठोस निर्णय लेना चाहिए।"
महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
प्रदर्शन में इंदु प्रकाश सिंह, गणेश पांडेय, संतोष चौरसिया, ममता देवी, मालती, दिलीप मिश्रा, अभिषेक मिश्रा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।




