Sonbhadra News : बीएसए के खिलाफ शिक्षक संगठनों ने खोला मोर्चा, अमर्यादित भाषा से आहत हैं शिक्षक
उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ के आह्वान पर शिक्षक नेताओं ने बीएसए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनके विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। शिक्षकों का कहना है कि किसी भी शिक्षक के विरुद्ध दुर्व्यवहार......

sonbhadra
8:27 PM, August 24, 2025
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• सोमवार को आगे की रणनीति तय करेंगे शिक्षक
सोनभद्र । उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ के आह्वान पर शिक्षक नेताओं ने बीएसए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनके विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। शिक्षकों का कहना है कि किसी भी शिक्षक के विरुद्ध दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। महिला शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार के बाद अब शिक्षक और बीएसए आमने-सामने आ गए हैं।
बताते चलें कि शनिवार को भारी बारिश के बीच महिला शिक्षक संघ डीसी के कार्यप्रणाली की बीएसए मुकुल आनन्द पाण्डेय से शिकायत करने सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय पहुँची थी, जहाँ काफ़ी इंतजार के बाद भी बीएसए नहीं पहुँचे और महिला शिक्षकों के बार-बार अनुरोध करने पर ज़ब पहुँचे डीसी अरविंद कुमार पाठक के विरुद्ध कोई कार्यवाही करने के बजाय महिला शिक्षकों पर ही भड़क उठे और उनके साथ दुर्व्यवहार करते हुए उन्हें अपने कार्यालय से भाग जाने के लिए कह दिया।
रविवार को मीडिया से रूबरू हुई पीड़ित शिक्षिकाओं ने अपनी आपबीती सुनाई और सभी शिक्षकों व शिक्षक संगठनों से समर्थन की अपील की। इस दौरान उत्तर प्रादेशिय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष योगेश कुमार पाण्डेय ने भी अपना समर्थन देते हुए कहा कि किसी भी शिक्षक के विरुद्ध दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
वहीं पीड़ित शिक्षिका कुंजलता त्रिपाठी ने कहा कि "कुछ दिनों पूर्व वह विभागीय समस्या को लेकर डीसी अरविंद पाठक से बात करना चाहती थी लेकिन वह फोन नहीं उठा रहे थे, जिस पर शुक्रवार को वह सीधे सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय पहुँच गई, जहाँ डीसी ने उनसे समस्या के संबंध में बात करने के बजाय उटपटांग बातें करने लगे और उन्हें देख लेने की धमकी देने लगे। इसकी शिकायत लेकर ज़ब वह बीएसए से मिली तो उन्होंने इसपर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई तब उन्होंने इसकी शिकायत महिला शिक्षक संघ को की। जिस पर महिला शिक्षक संघ के पदाधिकारी जिलाध्यक्ष कौसर जहाँ सिद्दीकी के साथ एसएसए कार्यालय पहुंची। जहाँ पहले तो बीएसए मिलने को तैयार नहीं हुए और ज़ब मिले तो महिला शिक्षिकाओं पर ही बरस पड़े और दुर्व्यवहार करने लगे। बीएसए ने उन्हें बगैर शिकायत सुने ही सभी शिक्षिकाओं को अपमानित करते हुए उनके कार्यालय से भाग जाने को कहा। बीएसए के इस कार्यप्रणाली से सभी शिक्षिकाएं आहत हैं।"
वहीं शिक्षिका वर्षा वर्मा ने कहा कि "बीएसए का महिला शिक्षिकाओं के प्रति यह रवैया निंदनीय है। हमसब सिर्फ अपनी शिकायत लेकर उनसे मिलना चाहती थी और उन्होंने सभी का मोबाइल बाहर रखवा दिया और उसके बाद उन सभी के साथ दुर्व्यवहार किया। उनकी संगठन की जिलाध्यक्ष राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका कौसर जहाँ सिद्दीकी के साथ भी उन्होंने दुर्व्यवहार किया। बीएसए ने वहाँ उपस्थित सभी शिक्षकों को कहा कि वह सभी एक दिन भी विद्यालय नहीं जाती और सिर्फ नेतागिरी करती हैं। तो यदि हम पढ़ाते नहीं तो उनके विद्यालय निपुण कैसे हुए। जिला 73वें स्थान से छठवें स्थान पर कैसे पहुँचा।"
वहीं शिक्षिका गायत्री त्रिपाठी आदि ने कहा कि "डीसी को बचाने के लिए बीएसए इतनी रूचि क्यूँ ले रहे हैं यह तो उन्हें नहीं पता लेकिन वह चाहते तो पुरे मामले को सुलझा सकते थे, लेकिन महिला शिक्षिकाओं से दुर्व्यवहार से वह बहुत ही आहत हैं। उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग को ही कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि पूरे विभाग में भ्रष्टाचार और अराजकता का माहौल है, सभी लोग बेलगाम होकर कम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य पुरस्कार की होड़ में तीन शिक्षिकाएं शामिल थी लेकिन घोषणा के ठीक एक दिन पूर्व रात में सिर्फ एक शिक्षिका को बुलाकर इंटरव्यू कर लिया गया और दो अन्य को अनुपस्थित कर दिया गया जबकि हम दोनों को इंटरव्यू के लिए विभाग की तरफ से कोई सुचना ही नहीं दी गई थी तो ये माहौल बेसिक शिक्षा विभाग का। वह सभी इस दुर्व्यवहार के विरुद्ध चुप नहीं बैठेंगी।"
वहीं शिक्षिकाओं के विरोध को समर्थन देते हुए उत्तर प्रादेशिय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष योगेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि "शिक्षिकाओं के दुर्व्यवहार की वह घोर निंदा करते हैं, किसी भी सूरत में शिक्षकों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। शिक्षक अपनी समस्या लेकर बीएसए के पास नहीं जायेगा तो कहाँ जायेगा। उन्होंने कहा कि पूरे मामले को लेकर सोमवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी से वार्ता की जाएगी। यदि दोषी के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं होती है तो महिला शिक्षक संघ के निर्देशानुसार अग्रिम निर्णय लिया जायेगा।"




