Sonbhadra News : पानी से घिरा सुंदरी गाँव, ग्रामीण बोले "काले पानी की सजा" का होता हैं एहसास
तीन तरफ से कनहर बांध के पानी से घिरा सुंदरी गाँव, उत्तर प्रदेश से कटा रास्ता तो छत्तीसगढ़ बना निकास का इकलौता सहारा

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7:38 AM, September 30, 2026
- छत्तीसगढ़ बना निकास का एकलौता सहारा
रमेश (संवाददाता)
दुद्धी (सोनभद्र) । उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित सोनभद्र जिले के दुद्धी तहसील का सुंदरी गाँव इन दिनों विकास की बड़ी-बड़ी दावों के बीच एक भयावह मानवीय त्रासदी झेल रहा है। क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित कनहर बांध परियोजना में पानी का भराव शुरू होने के बाद से यह पूरा इलाका टापू में तब्दील हो चुका है। भौगोलिक रूप से सुंदरी गाँव अब तीन तरफ से कनहर बांध के अथाह जलभराव से घिर चुका है, जिसके कारण उत्तर प्रदेश की सीमा से इसका ज़मीनी संपर्क पूरी तरह टूट गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य भू-भाग में आने-जाने का कोई रास्ता न बचने के कारण अब यहाँ के ग्रामीणों के लिए पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ ही निकास का एकमात्र सहारा बना हुआ है। गाँव के लोग आज के आधुनिक दौर में भी अपनों के बीच 'कालापानी' जैसी एकाकी और नारकीय जिंदगी जीने के लिए विवश हैं।
अधिकारियों के डूब क्षेत्र सर्वे पर खड़े हुए गंभीर सवाल ?
कनहर बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले गाँवों के विस्थापन को लेकर जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा किए गए सर्वे पर अब ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि जब पूरा इलाका पानी में डूब रहा है, तो सुंदरी गाँव की लगभग एक तिहाई आबादी को आख़िर किस आधार पर डूब क्षेत्र से बाहर रखा गया? जब गाँव के चारों तरफ पानी भर चुका है और उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले सभी मुख्य रास्ते व रपटे जलमग्न हो चुके हैं, तो कागजों पर इस आबादी को सुरक्षित दिखाकर अधिकारियों ने किस तरह का सर्वे किया है, यह समझ से परे है। भरे पानी के बीच से ग्रामीण रोजमर्रा के कार्यों, चिकित्सा और बच्चों की पढ़ाई के लिए कैसे आवागमन करेंगे, इसकी चिंता प्रशासन को बिल्कुल नहीं है।
₹300 भाड़ा लगाकर 80 किलोमीटर दूर से आ रहा मुफ़्त का राशन-
इस अव्यवहारिक व्यवस्था का सबसे दर्दनाक पहलू ग्रामीणों के निवाले पर पड़ा है। सरकार की ओर से मिलने वाले मुफ़्त राशन (गल्ला) को पाने के लिए सुंदरी गाँव के विस्थापितों और ग्रामीणों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। गाँव के कोटे की व्यवस्था अमवार कॉलोनी में होने के कारण ग्रामीणों को उत्तर प्रदेश की ओर से कोई सीधा रास्ता नहीं मिलता। राशन लेने के लिए ग्रामीणों को मजबूरन छत्तीसगढ़ के रास्ते एक लंबा चक्कर काटना पड़ता है। मात्र कुछ किलो मुफ़्त का अनाज लेने के लिए प्रत्येक ग्रामीण को लगभग 80 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिसमें उनका करीब 300 रुपये का नगद भाड़ा लग जाता है। गरीब आदिवासियों और ग्रामीणों के लिए मुफ़्त का राशन अब जेब पर भारी पड़ रहा है।इस अव्यवहारिक पुनर्वास नीति और सर्वे की विसंगतियों के कारण सुंदरी गाँव के सैकड़ों परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने उत्तर प्रदेश शासन और स्थानीय जिला प्रशासन से मांग की है कि कागजी दावों को छोड़कर मौके की जमीनी हकीकत का दोबारा निष्पक्ष सर्वे कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि तीन तरफ से पानी से घिरे इस हिस्से को भी तत्काल डूब क्षेत्र में शामिल कर पूर्ण विस्थापन पैकेज, उचित मुआवजे और अमवार कॉलोनी के बजाय गाँव के पास ही अस्थाई राशन वितरण व सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिल सके।
इस संबंध में दुद्धी उप जिलाधिकारी अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि सुंदरी गाँव के अवशेष विस्थापितों के लिए सुविधा मुहैया कराने हेतु क्षेत्रीय लेखपाल एवं पूर्ति निरीक्षक और संबंधित ब्लॉक को निर्देशित किया गया हैं। समस्याओं के निस्तारण एवं पूर्ण विस्थापन को लेकर सिंचाई विभाग से समन्वय बनाकर आगे की रणनीति तय करते हुए शासन को पत्र भेजा जाएगा।




