Sonbhadra News : श्रीरामलीला-शबरी द्वारा श्रीराम प्रभु के आतिथ्य भाव तथा लंका दहन लीला का हुआ मंचन
महुली के राजा बरियार शाह खेल मैदान में मंचित हो रहे श्रीरामलीला का नवां दिन

महुली के ऐतिहासिक रामलीला में मंचन करते कलाकार
सोनभद्र
12:14 PM, September 30, 2025
धर्मेन्द्र गुप्ता (संवाददाता)
विंढमगंज (सोनभद्र)। क्षेत्र के महुली के राजा बरियार शाह खेल मैदान पर चल रहे रामलीला का नवें दिन शबरी के घर प्रभु श्रीराम का आगमन,सुग्रीव मित्रता,बालि बद्ध,सुग्रीव का राज्याभिषेक,लंका दहन इत्यादि मार्मिक प्रसंगों का कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शक दीर्घा में धाक जमाये रहे।
रामलीला के क्रम में मतंग ऋषि ने अपने अंतिम समय में बताया कि हे शबरी इसी आश्रम में तुम प्रभु श्रीराम का प्रतीक्षा करो।वे तुमसे मिलने जरूर आयेंगे।प्रभु की प्रतीक्षा में शबरी के दिन बीतने लगे।रोज-रोज राम के लिए मीठे बेर तोड़ कर लाती।बेर में कीड़े न हो और खट्टे न हो इसलिए प्रत्येक बेर को तोड़ कर चखती थी।एक दिन दो सुंदर युवकों को गुजरते देख उसे ज्ञात होता है कि उसके प्रभु का आगमन हो गया है तो उन्हें आदर के साथ कुटिया में लाकर उनके पाँव धोकर उन्हें मीठे बेर खिलाती है। इसी समय शबरी को ऋषि के कहे वचन याद आते हैं
... "ताहि देइ गति राम उदारा,शबरी के आश्रम पगु धारा।
शबरी देखि राम गृह आए,मुनि के बचन समुझि जिय भाए।।
अपने समीप प्रभु को पाकर उसका जीवन धन्य हो गया।यह मनोहर दृश्य देखते बनती थी। अन्य दृश्यों में प्रभु श्री राम लक्ष्मण के साथ माता जानकी की खोज में बिचरण करते हैं।वहीँ दक्षिण दिशा के ऋष्यमूक पर्वत पर सुग्रीव नाम का बानर अपने भाई बाली के डर से कन्दराओं में छिपकर रहता था।बिचरण करते दो अनजान युवकों को देख सुग्रीव को डर होता है कि कहीँ ये युवक बालि के भेजे दूत तो नही हैं।यह जानकर हनुमान को भेज पता कराते है।हनुमान प्रभु श्रीराम से मिलकर उनकी सुग्रीव से मित्रता कराते हैं।वहीँ प्रभु श्रीराम अपने मित्र की सहायता करने के लिए बालि का बध कर सुग्रीव को पम्पापुर का राजा तथा बाली के पुत्र अंगद को युवराज घोषित करते है।इसप्रकार अन्य कौतुहल भरे दृश्य जिसमें कलाकारों ने बिभिन्न चरित्रों का सजीव चित्रण किया।
-हनुमान ने दशानन को सीख दी, तो लगवा दी पूँछ में आग
उधर बानरी सेना सीता माता की खोज में समुद्र तट पर पहुँचती है।अब इस विशाल समुद्र को कैसे पार किया जाय,इसकी मन्त्रणा होती है।तब सबसे बूढे जामवन्त, हनुमान को उनकी शक्ति की याद दिलाते हैं ।प्रभु श्रीराम द्वारा दिए गए अंगूठी लेकर हनुमान समुद्र को पार करने को उड़ते हैं।समुद्र पथ पर उन्हें अनेक राक्षसों का सामना करना पड़ता है।इसके बाद लंका के प्रवेश द्वार पर पहुँचते हैं जहाँ लँकनी से मुलाकात होती है।राक्षसों से भरी लंका के बीच रावण का छोटा भाई भिभिषण राम का नाम जपता है।जिसे सुन हनुमान उनसे मिलते हैं तथा सीता माँ को अशोक वाटिका में होने की जानकारी प्राप्त करते हैं।माता जानकी से मिलकर श्रीराम की दी अंगूठी उन्हें देकर उनका सन्देश देते हैं।भूख लगने की इच्छा व्यक्त कर सीता माँ की आज्ञा पाकर वाटिका का फल खाकर अपनी भूख मिटाते हैं तथा वाटिका को भी नस्ट कर देते हैं।बिरोध करने पर रावण का पुत्र अक्षय कुमार मारा जाता है।पुनः मेघनाथ ब्रह्मास्त्र में बांध हनुमान को रावण के दरबार में ले जाते हैं।जहाँ हनुमान ने रावण को समझाना चाहा कि प्रभु श्रीराम से क्षमा मानकर सीता माँ को लौटा दो,वे तुम्हे माफ़ कर देंगे।यह रावण को नागवार लगती है तथा हनुमान की पूँछ में आग लगवा देता है।जिससे हनुमान पूरी लंका जलाकर खाक कर देते हैं।उधर प्रत्येक दृश्य के बाद दर्शकों में कौतुहल की स्थिति उत्तपन्न होती थी कि अगले दृश्य में क्या होगा।
इस अवसर पर रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविन्द जायसवाल,अमित कन्नौजिया,वीरेन्द्र कन्नौजिया,अमानुल्लाह सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।



