Sonbhadra News : पर्यटन के दावों की पोल खोलता सोनभद्र! विश्व विरासत दिवस पर सूने पड़े संग्रहालय, खंडहर में तब्दील व्यवस्था

पर्यटन को बढ़ावा देने के सरकारी दावों के बीच सोनभद्र की जमीनी तस्वीर सवाल खड़े कर रही है। विश्व विरासत दिवस पर जहां देश-दुनिया के संग्रहालयों में रौनक और भीड़ नजर आई, वहीं जनपद के मऊ और सतद्वारी....

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11:31 PM, April 18, 2026

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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)

सोनभद्र । पर्यटन को बढ़ावा देने के सरकारी दावों के बीच सोनभद्र की जमीनी तस्वीर सवाल खड़े कर रही है। विश्व विरासत दिवस पर जहां देश-दुनिया के संग्रहालयों में रौनक और भीड़ नजर आई, वहीं जनपद के मऊ और सतद्वारी (शिवद्वार) स्थित संग्रहालय सूने पड़े रहे। टूटती व्यवस्थाएं और उपेक्षा साफ तौर पर सिस्टम की पोल खोलती दिखीं।

सोनभद्र जनपद के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले सतद्वारी (शिवद्वार) और विजयगढ़ दुर्ग क्षेत्र के मऊ गांव में स्थापित स्थलीय संग्रहालय वर्षों से बंद पड़े हैं। विश्व विरासत दिवस जैसे खास अवसर पर भी यहां सन्नाटा पसरा रहा। दूर-दराज से पहुंचे पर्यटक, छात्र और स्थानीय लोग बंद गेट और जर्जर भवन को देखकर मायूस होकर लौट गए।

कभी इतिहास और संस्कृति को संजोने के उद्देश्य से बनाए गए ये संग्रहालय आज खुद खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। दीवारें और खिड़कियां टूट चुकी हैं, सुरक्षा के अभाव में अंदर रखी दुर्लभ मूर्तियां और कलाकृतियां भी खतरे में हैं। मूर्ति तस्करों की नजर इन अमूल्य धरोहरों पर गड़ी हुई है, जिससे इनके चोरी होने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

इतिहासकार दीपक कुमार केसरवानी के अनुसार, "लंबे संघर्ष और प्रयासों के बाद 11वें वित्त आयोग के तहत उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा इन संग्रहालयों का निर्माण कराया गया था। वर्ष 2009 में बड़े स्तर पर उद्घाटन के बाद कुछ वर्षों तक संचालन हुआ, लेकिन बाद में कर्मचारियों और बजट के अभाव में इन्हें बंद कर दिया गया।"

वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता राम अनुज धर द्विवेदी ने कहा कि "विश्व प्रसिद्ध शिवद्वार मंदिर में हर साल शिवरात्रि, सावन और अन्य आयोजनों में लाखों श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में संग्रहालय को पर्यटन से जोड़ने की बड़ी संभावना थी, लेकिन लापरवाही के चलते यह सपना अधूरा रह गया।"

"बहरहाल बार-बार शिकायतों के बावजूद हालात जस के तस बने रहना जिम्मेदार तंत्र की उदासीनता को दर्शाता है। ऐसे में अब स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए स्पष्ट किया कि यदि जल्द संग्रहालयों को व्यवस्थित कर नियमित संचालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो सोनभद्र की ऐतिहासिक धरोहर यूं ही उपेक्षा की भेंट चढ़ती रहेगी और पर्यटन को बढ़ावा देने के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगे।"

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