वहीं डीपीसी अनिल केशरी ने बताया कि प्लास्टिक मुक्त पंचायत बनाने के लिए चार चरणों में कार्य किया जा रहा है। गांव में बिखरे प्लास्टिक को इकट्ठा करना, प्रत्येक घर पर बोरी लगाकर लोगों को प्लास्टिक कचरा अलग रखने के लिए प्रेरित करना, ई-रिक्शा के जरिए घर-घर से प्लास्टिक कचरा इकट्ठा कर आरआरसी में जमा करना, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट तकनीक से कचरे का सही निस्तारण और पुनर्चक्रण करना, घर पर कचरे से प्लास्टिक अलग करने से पर्यावरणीय प्रदूषण कम होगा, गांव स्वच्छ और सुंदर बनेंगे, प्लास्टिक खाने से जानवरों को बचाना और मृदा प्रदूषण रोकना, प्लास्टिक मुक्त मिट्टी से भूगर्भ जल रिचार्ज बढ़ेगा, पुनर्चक्रण से उपयोगी उत्पाद बनाकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा जिससे ग्राम पंचायत का आय बढ़ेगा। वहीं ई-रिक्शा और आरआरसी के संचालन से यह अभियान और भी प्रभावी होगा।