Sonbhadra News : कान्हा के स्वागत को तैयार सोनांचल, पोशाकों से लेकर झूलों तक सजा बाजार
सावन और रक्षाबंधन पर्व के बाद अब सोनांचल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर मंदिरों में सजावट शुरू हो गई है तो बाजार भी नंदलाला के रंग में रंग गए...

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4:45 PM, September 2, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• बाजारों में उमड़ने लगी श्रद्धालुओं की भीड़
सोनभद्र । सावन और रक्षाबंधन पर्व के बाद अब सोनांचल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर मंदिरों में सजावट शुरू हो गई है तो बाजार भी नंदलाला के रंग में रंग गए हैं। शीतला मंदिर चौक, धर्मशाला चौक और मेन मार्केट समेत प्रमुख बाजारों में लड्डू गोपाल की पोशाक, मुकुट, मोरपंख, बांसुरी, झूले, मटकी, आभूषण और पूजन-सजावट की सामग्री से दुकानें सज गई हैं।
जन्माष्टमी का पर्व नजदीक आते ही घर-घर में बाल गोपाल के स्वागत की तैयारियां शुरू हो गई हैं। भक्त अपने आराध्य लड्डू गोपाल को आकर्षक रूप देने के लिए उनकी पसंद की पोशाक, मुकुट और श्रृंगार सामग्री खरीदने में जुटे हैं। बाजार में इस बार सतरंगी पोशाकों से लेकर मोतियों और जरकन से सजे मुकुट तक की खूब मांग देखने को मिल रही है।
कान्हा के लिए कैरम से लेकर क्रिकेट बैट तक उपलब्ध -
इस बार लड्डू गोपाल के श्रृंगार के साथ उनके लिए छोटे-छोटे खिलौने भी लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। नन्हे कान्हा के साथ खेलने के लिए कैरम, लूडो, क्रिकेट बैट, बैडमिंटन रैकेट, गुल्ली-डंडा और झुनझुना जैसे खिलौने बाजार में उपलब्ध हैं। वहीं जरकन की कारीगरी वाले छोटे गिटार और चश्मे भी खास तौर पर लोगों की पसंद बने हुए हैं।
श्रद्धालुओं में बाल गोपाल के दिव्य श्रृंगार को लेकर खासा उत्साह है। पीतल और अष्टधातु की प्रतिमाओं को घर के मंदिर में आकर्षक रूप देने के लिए भक्त मुकुट, हार, झुमकी, बाजूबंद, कड़े, पायल, कमरबंद और जूतियों तक की खरीदारी कर रहे हैं।
मोरपंखी मुकुट की सबसे ज्यादा डिमांड -
बाजार में मोरपंख लगे मुकुट लोगों को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रहे हैं। जरकन और मोतियों से सजे मुकुटों की भी अच्छी मांग है। कई दुकानों पर मुकुट, हार, झुमके, बांसुरी, बाजूबंद, कमरबंद, जूती और चश्मे का आकर्षक पैक भी उपलब्ध है। वहीं राधा-कृष्ण की जोड़ी के लिए एक जैसे डिजाइन की पोशाकें भी ग्राहकों को खूब पसंद आ रही हैं।
दुकानदार चंदन केशरी, संदीप केशरी और बाबूलाल ने बताया कि "इस बार राजस्थान और गुजरात की पारंपरिक डिजाइन वाली पोशाकें विशेष रूप से मंगाई गई हैं। लड्डू गोपाल की प्रतिमा के आकार के अनुसार अलग-अलग डिजाइन और साइज की पोशाकें उपलब्ध हैं। पर्व नजदीक आने के साथ बिक्री में तेजी आने की उम्मीद है और जन्माष्टमी से एक दिन पहले बाजार में सबसे अधिक भीड़ उमड़ने की संभावना है।"
बांसुरी की तान और झूले की खरीदारी से गुलजार बाजार -
कान्हा की पहचान मानी जाने वाली छोटी-छोटी बांसुरियां भी खूब बिक रही हैं। वहीं नक्काशीदार और आकर्षक झूले खरीदने के लिए भी श्रद्धालु दुकानों पर पहुंच रहे हैं। घर के मंदिर को जन्माष्टमी पर देवलोक जैसा रूप देने के लिए सजावटी सामानों की खरीदारी भी बढ़ गई है।




