Sonbhadra News : आदिवासी अंचल में स्मार्ट क्लास से चमकी सरकारी स्कूलों की सूरत, 900 विद्यालयों में डिजिटल क्लास से आसान हुई पढ़ाई
आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र में अब सरकारी विद्यालय भी आधुनिक शिक्षा की नई पहचान बनते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने......

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4:52 PM, July 27, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र में अब सरकारी विद्यालय भी आधुनिक शिक्षा की नई पहचान बनते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने की मुहिम रंग ला रही है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार एवं संपर्क फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से जिले के सभी 10 विकास खंडों के 900 परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास संचालित की जा रही हैं। इसका सीधा लाभ हजारों छात्र-छात्राओं को मिल रहा है, जो अब डिजिटल माध्यम से गुणवत्तापूर्ण, रोचक और आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि "संपर्क फाउंडेशन की एसटीवी (STV) डिवाइस नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विकसित की गई है। इसमें एनसीईआरटी एवं एससीईआरटी से अनुमोदित शैक्षणिक सामग्री पहले से ही उपलब्ध रहती है। एनीमेशन, चित्रों, वीडियो, गतिविधियों और ऑडियो-विजुअल कंटेंट के माध्यम से तैयार किए गए पाठ बच्चों को विषयों को आसानी से समझने में मदद कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस डिवाइस के संचालन के लिए इंटरनेट की आवश्यकता नहीं होती, जिससे दूरस्थ और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों के विद्यालयों में भी इसका प्रभावी उपयोग हो रहा है।"
जिलाधिकारी ने बताया कि "स्मार्ट क्लास शुरू होने के बाद शिक्षण व्यवस्था में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। शिक्षक अब पारंपरिक पद्धति के साथ डिजिटल तकनीक का उपयोग कर कक्षाओं को अधिक प्रभावी और आकर्षक बना रहे हैं। इससे विद्यार्थियों की उपस्थिति में सुधार हुआ है, कक्षा में उनकी सहभागिता बढ़ी है और सीखने की क्षमता भी पहले की अपेक्षा अधिक विकसित हुई है। एनीमेशन आधारित शिक्षण सामग्री के कारण गणित, विज्ञान, हिंदी और अंग्रेजी जैसे विषय बच्चों के लिए अब कठिन नहीं रह गए हैं। दृश्य और श्रव्य माध्यम से पढ़ाए जाने वाले पाठ विद्यार्थियों को लंबे समय तक याद रहते हैं। यही कारण है कि बच्चों में पढ़ाई के प्रति उत्साह और आत्मविश्वास दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। विद्यालयों का वातावरण भी पहले की तुलना में अधिक जीवंत और शिक्षण के अनुकूल बन गया है।"




