सचिवों ने आरोप लगाया कि "शासन द्वारा लागू की गई ऑनलाइन उपस्थिति (FRS) उनके फील्ड आधारित दायित्वों के बिल्कुल विपरीत है। उनका अधिकांश समय गांवों में विकास कार्यों की निगरानी, सत्यापन, जनसमस्याओं के निस्तारण, समितियों की बैठकों तथा योजनाओं की प्रगति की समीक्षा में व्यतीत होता है। ऐसे में प्रतिदिन ब्लॉक कार्यालय पहुंचकर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना न तो व्यावहारिक है और न ही उनके कार्य की वास्तविकता के अनुरूप। ग्राम पंचायत सचिवों ने गैर विभागीय अतिरिक्त कार्यभार थोपने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि विभागीय दायित्व पहले से ही व्यापक और संवेदनशील हैं, लेकिन इसके बावजूद विभिन्न विभागों की अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंप दी जाती हैं, जिससे ग्रामीण विकास योजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। सचिवों का कहना है कि कार्यक्षेत्र, दायित्व और समय का संतुलन बनाए बिना लगातार अतिरिक्त कार्यभार देना उचित नहीं है।"