Sonbhadra News : ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती, कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक पशुपालन से आय बढ़ाने का दिया गया मंत्र
उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार दुग्ध स्वर्ण महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को विकास भवन सभागार में जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य...

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8:02 PM, August 5, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार दुग्ध स्वर्ण महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को विकास भवन सभागार में जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य, दुग्ध गुणवत्ता सुधार तथा शासन की विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने पशुपालकों से आधुनिक तकनीकों को अपनाकर दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और आय में वृद्धि करने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी ने की।
मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी ने कहा कि "डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। वैज्ञानिक पशुपालन, संतुलित पशु आहार, नियमित टीकाकरण तथा आधुनिक डेयरी तकनीकों को अपनाकर पशुपालक न केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ा सकते हैं, बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने सभी संबंधित विभागों से समन्वित प्रयास करते हुए शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र पशुपालक तक पहुंचाने का आह्वान किया।"
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ0 अजय कुमार मिश्रा ने पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, संक्रामक रोगों की रोकथाम, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, कृत्रिम गर्भाधान, संतुलित पशु पोषण एवं विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ पशु ही बेहतर और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन का आधार हैं, इसलिए नियमित टीकाकरण, समय पर उपचार और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
कॉन्क्लेव के दौरान विशेषज्ञों ने आधुनिक डेयरी प्रबंधन, दुग्ध गुणवत्ता सुधार, पशु कल्याण तथा सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत प्रस्तुति दी। साथ ही पशुपालकों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया और डेयरी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले दुग्ध उत्पादकों को सम्मानित भी किया गया।
इस अवसर पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, पशुपालन विभाग, दुग्ध विकास विभाग के अधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी, दुग्ध उत्पादक किसान, स्वयं सहायता समूहों एवं दुग्ध सहकारी समितियों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।




