Sonbhadra News : बरसात में खुली सड़कों की पोल, अब एक सप्ताह में गड्ढे भरने का फरमान
जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक संपन्न.....

जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक करते डीएम चर्चित गोंड......
sonbhadra
6:39 PM, August 25, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । बरसात के दौरान सड़कों की बदहाली और जगह-जगह उभरे गड्ढों ने जिले की सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिया है। अब जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने एक सप्ताह के भीतर सड़कों के गड्ढे भरने के निर्देश दिए हैं साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि हादसा हुआ तो संबंधित की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी लेकिन जब हर साल बारिश से पहले सड़कों को गड्ढामुक्त करने का दावा और अभियान चलता है तो मानसून आते ही सड़कें फिर गड्ढों में क्यों तब्दील हो जाती हैं, यह भी एक यक्ष प्रश्न है।
आज कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई, नगर निकायों और जिला पंचायत समेत संबंधित विभागों को अपने-अपने क्षेत्रों की सड़कों का स्थलीय निरीक्षण कर प्राथमिकता के आधार पर गड्ढे भरने के निर्देश दिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि गड्ढों के कारण यदि दुर्घटना होती है तो संबंधित अधिकारी या विभाग की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
बारिश ने खोली ‘गड्ढामुक्त सड़कों’ की हकीकत -
सोनभद्र जैसे बड़े भौगोलिक क्षेत्र वाले जिले में सड़कें पहले से ही चुनौती बनी हुई हैं। बारिश शुरू होते ही कई मार्गों पर गड्ढे और गहरे हो गए हैं। कहीं सड़क की ऊपरी परत उखड़ गई तो कहीं पानी भरने से गड्ढों की गहराई का अंदाजा लगाना तक मुश्किल हो गया। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए खतरा और बढ़ गया है।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि गड्ढे इतने गंभीर हैं कि उन्हें भरने के लिए विशेष अभियान चलाने की जरूरत पड़ रही है, तो बारिश से पहले सड़कों का निरीक्षण और मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? क्या विभागीय स्तर पर गड्ढों की पहचान समय से नहीं हुई या फिर मरम्मत के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई?
हादसा हुआ तो जिम्मेदारी तय होगी, लेकिन पहले जिम्मेदार कौन -
जिलाधिकारी ने बैठक में कहा कि गड्ढों के कारण दुर्घटना होने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी लेकिन सवाल यह भी है कि अब तक गड्ढों के कारण हुई दुर्घटनाओं के लिए किसकी जिम्मेदारी तय की गई।
सड़क सुरक्षा से जुड़े निर्देशों में अक्सर दुर्घटना संभावित स्थानों को चिह्नित करने, मरम्मत कराने और यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने की बात सामने आती है। इसके बावजूद बरसात आते ही सड़कें बदहाल नजर आने लगती हैं। ऐसे में इस बार केवल गड्ढे भरने का आदेश नहीं, बल्कि गड्ढामुक्ति की गुणवत्ता और उसकी स्थायित्व की निगरानी भी जरूरी होगी।
एक सप्ताह की समयसीमा, क्या धरातल पर दिखेगा असर -
जिलाधिकारी ने एक सप्ताह के भीतर अभियान चलाकर गड्ढे भरने के निर्देश दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि संबंधित विभाग इस समयसीमा का कितना पालन करते हैं। खासकर उन मार्गों पर जहां गड्ढे दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं, वहां सिर्फ मिट्टी, गिट्टी या खानापूर्ति की पैचिंग के बजाय मानक के अनुरूप स्थायी मरम्मत होगी या नहीं, यह देखना अहम होगा।
आवारा पशु भी सड़क सुरक्षा के लिए चुनौती -
बैठक में सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित और आवारा पशुओं को लेकर भी जिलाधिकारी ने सख्ती दिखाई। नगर निकाय, जिला पंचायत राज विभाग और पशुपालन विभाग को अभियान चलाकर पशुओं को पकड़कर गौशालाओं में संरक्षित करने के निर्देश दिए गए। सड़क पर बैठे या अचानक वाहनों के सामने आने वाले पशु भी हादसों का बड़ा कारण बनते हैं।




