Sonbhadra News : चकबन्दी व सर्वे ग्रामों के किसानों को राहत, खाद-बीज वितरण पर नहीं पड़ेगा कोई असर
जनपद के चकबन्दी एवं सर्वे प्रक्रिया से गुजर रहे गांवों के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे किसानों को खाद, बीज एवं उर्वरक प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी....

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9:19 PM, June 12, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• पुरानी खतौनी के आधार पर मिलती रहेगी उर्वरक की सुविधा, 81.53% किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूर्ण
सोनभद्र । जनपद के चकबन्दी एवं सर्वे प्रक्रिया से गुजर रहे गांवों के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे किसानों को खाद, बीज एवं उर्वरक प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और पूर्व की व्यवस्था के अनुसार ही उन्हें आवश्यक कृषि सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
उप कृषि निदेशक वीरेंद्र कुमार ने बताया कि "वर्तमान में जिले के कुल 92 ग्राम में चकबन्दी एवं सर्वे प्रक्रिया के अंतर्गत हैं। इन गांवों में रियल टाइम खतौनी उपलब्ध न होने के कारण फिलहाल किसानों की फार्मर रजिस्ट्री (किसान पहचान पत्र) नहीं बन पा रही है। इसके बावजूद किसानों की खेती प्रभावित न हो, इसके लिए विभाग ने विशेष व्यवस्था लागू की है। उन्होंने बताया कि चकबन्दी एवं सर्वे ग्रामों के किसान अपनी पुरानी खतौनी अथवा चकबन्दी लेखपाल द्वारा प्रमाणित खतौनी के आधार पर सहकारी समितियों एवं अधिकृत उर्वरक विक्रेताओं से खाद, बीज और उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे। इससे किसानों को खरीफ सीजन में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी।"
उप कृषि निदेशक वीरेंद्र कुमार ने बताया कि "जिन किसानों की भूमि किसी अन्य गांव में दर्ज है, वे संबंधित गांव के गाटा नंबर के आधार पर निकटतम जनसेवा केंद्र से अपनी फार्मर रजिस्ट्री भी बनवा सकते हैं। विभाग ने किसानों से आवश्यक दस्तावेजों के साथ जल्द से जल्द रजिस्ट्री कराने की अपील की है। जनपद में कुल 2,17,990 किसानों के सापेक्ष 1,77,726 किसानों (81.53 प्रतिशत) की फार्मर रजिस्ट्री पूरी की जा चुकी है। शेष किसानों की रजिस्ट्री प्रक्रिया भी तेजी से जारी है।"
उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि "वे आधार कार्ड, खतौनी और मोबाइल नंबर के साथ जनसेवा केंद्र, कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों अथवा लेखपाल के माध्यम से शीघ्र फार्मर रजिस्ट्री कराएं और अपने सभी गाटों को फार्मर आईडी से लिंक कराएं, ताकि भविष्य में कृषि एवं अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिलता रहे।"




