Sonbhadra News : निजी अस्पताल का कारनामा, डॉक्टरों की लापरवाही से अब कभी मां नहीं बन सकेगी प्रसूता, जानें क्या है पूरा मामला
जिला में प्राइवेट अस्पतालों का एक और कारनामा सामने आया है, यहां प्रसव कराने आयी प्रसूता की हॉस्पिटल स्टाप द्वारा लापरवाहीपूर्वक प्रसव कराया गया जिससे प्रीमेच्योर बच्चे की मृत हो गयी वहीं डिलीवरी....

पीड़िता के पति रितेश तथा सीएमओ डॉ0 अश्वनी कुमार
sonbhadra
7:27 AM, February 21, 2025
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिला में प्राइवेट अस्पतालों का एक और कारनामा सामने आया है, यहां प्रसव कराने आयी प्रसूता की हॉस्पिटल स्टाप द्वारा लापरवाहीपूर्वक प्रसव कराया गया सफलता नहीं मिलने पर ऑपरेशन कर प्रीमेच्योर बच्चे को बाहर निकाला और उसे भी मृत बता दिया, वहीं डॉक्टरों ने पैसा बनाने के चक्कर में घरवालों को सूचित किए बगैर प्रसूता की बच्चेदानी भी निकल दिया, जिससे अब महिला कभी भी मां नहीं बन सकती है। प्रसूता के परिजनों ने उच्चाधिकारियों से इसकी शिकायत कर कड़ी कार्यवाही की मांग की है। वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी ने पुरे मामले पर जाँच के लिए टीम गठित करते हुए जांच कराकर कार्यवाही की बात कही है।
बोले परिजन, लापरवाही पूर्वक कराया प्रसव -
कोन थाना क्षेत्र निवासी रितेश कुमार की पत्नी सविता देवी (26वर्ष) गर्भवती थी। उच्चाधिकारियों से की गई शिकायत में उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान वह अपनी पत्नी रुटीन चेकअप प्रति माह राॅबर्ट्सगंज के निजी अस्पताल की चिकित्सक से करा रहे थे। अंतिम बार 21 दिसंबर 2024 को दिखाया तो डाॅक्टर ने पत्नी की जांच कराकर सभी रिपोर्ट सही बताते हुए घर भेज दिया। इसके दो दिन बाद ही पेट में दर्द शुरू हो गया। आनन-फानन में पत्नी को अस्पताल लाया गया, जहां डाॅक्टर ने प्री-मेच्योर बच्चा होने की बात बताते हुए तत्काल भर्ती करवा लिया और एक कागज पर दस्तखत भी करवाया। डाॅक्टर ने गंभीर स्थिति बताते हुए तत्काल चार यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने को कहा। अस्पताल कर्मियों ने लापरवाहीपूर्वक प्रसव कराने का प्रयास किया। जब सफलता नहीं मिली तो ऑपरेशन कर शिशु को बाहर निकाला। अस्पताल नर्स ने प्री-मेच्योर बच्चे को मृत पैदा होना बताया तथा पत्नी की गंभीर स्थिति देखते हुए रेफर कर दिया।
परिजनों को वाराणसी में इलाज के दौरान गर्भाशय निकालने की मिली जानकरी -
पीड़िता के पति ने बताया कि वाराणसी स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान डाॅक्टर ने जांच कर बताया कि प्री मेच्योर डिलेवरी के समय ऑपरेशन के दौरान गर्भाशय भी निकाल दिया गया है। वाराणसी के निजी अस्पताल में अभी भी महिला का इलाज जारी है। रितेश के मुताबिक अभी तक लगभग आठ लाख खर्च हो चुके हैं। अगर समय रहते वाराणसी नहीं जाते तो उस अस्पताल में पत्नी की मौत हो सकती थी। उन्होंने उच्चधिकारीयों को शिकायती पत्र भेज रॉबर्ट्सगंज स्थिति निजी अस्पताल पर कड़ी कार्यवाही की मांग की है।
जाँच कर होगी कार्यवाही -
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 अश्वनी कुमार ने बताया कि "मामले में टीम गठित कर जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके मुताबिक आगे की कार्यवाही की जाएगी।"
बहरहाल निजी अस्पतालों की लापरवाही का यह कोई पहला मामला सामने नहीं आया है लेकिन शिकायत के बाद भी इन अस्पतालों पर कार्यवाही नहीं होने से जहाँ इनके हौसले बुलंद हो जाते हैं, वहीं इसका खामियाजा सोनाँचल की भोलीभाली जानता को भुगतना पड़ता है। ऐसे में अब देखने वाली बात यह होगी की इस मामले में स्वास्थ्य महकमा क्या कार्यवाही करता है या फिर जाँच के नाम पर समय व्यतीत कर पुरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।




