Sonbhadra News : स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यप्रणाली ने ली एक और जच्चा-बच्चा की जान
जच्चा -बच्चा मौत का बाद मैनेज का खेल जारी, अस्पताल संचालक मामले को रफा-दफा कराने में जुटा...

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9:25 AM, December 9, 2025
आनन्द कुमार चौबे/रमेश यादव (संवाददाता)
सोनभद्र । स्वास्थ्य विभाग लगातार जांच कर निजी अस्पतालों पर कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति और ऑल इज वेल का भले ही ढोल पिटता हो लेकिन सोमवार को दुद्धी कस्बे में एक सीज अस्पताल में हुई जच्चा-बच्चा की मौत ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल दी है साथ ही स्वास्थ्य विभाग की जाँच टीम की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
स्वास्थ्य विभाग के दावों की खुली पोल -
बताते चलें कि कुछ दिनों पूर्व दुद्धी कस्बे में जच्चा-बच्चा और एक अन्य प्रसूता की मौत के बाद निजी अस्पताल जाँच के घेरे में आ गए थे, जिलाधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दुद्धी के कई निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया, इज दौरान कई अस्पताल मानक विहीन और अवैध रूप से संचालित होते पाए गए थे, जिस पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उन पर कार्यवाही करते हुए सीज और FIR की कार्यवाही की बात कही था और नोडल अधिकारी के नेतृत्व में लगातार जाँच कर ऑल इज वेल का दावा भी कर रहे थे लेकिन सोमवार को सीज अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत ने स्वास्थ्य विभाग के सभी दावों की हवा निकाल दी। वहीं अपनी भद्द पीटती देख जहाँ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शिकायत मिलने पर कार्यवाही करने और पूर्व में ही FIR दर्ज कराने के बाद भी पुलिसिया कार्यवाही में लापरवाही की बात कह रहा है, वहीं दुद्धी कोतवाली पुलिस ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से अब तक एक भी लिखित तहरीर नहीं मिली है जो तहरीर भेजी भी गई है वो व्हाट्स एप्प पर भेजी जाती है।
सुचना के बाद भी नहीं पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम -
वहीं दूसरी तरफ सोमवार को भी दुद्धी कस्बे में स्थित एक निजी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत हुई तो अस्पताल संचालक बड़े चालाकी से निजी एम्बुलेंस बुलाकर मरीज रेफर कर अपने अस्पताल का नेम प्लेट और बोर्ड हटाकर तथा तालाबंद करके मामले की सेटिंग में जुट गया। यहां तक बताया गया कि जच्चा-बच्चा के अलावा एक-दो मरीज और भर्ती थे जिन्हे तत्काल दूसरे किसी अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया हैं। सोमवार को जच्चा -बच्चा की मौत की खबरें से कस्बे में हड़कंप मच गया और बोम गाँव के दर्जनों ग्रामीण उक्त आरोपी अस्पताल के सामने पहुंचकर आक्रोश जाहिर करते हुए शव आने का इंतजार करते रहे लेकिन देर रात तक मृतक जच्चा-बच्चा की शव दुद्धी नहीं पहुंच सकी थी जबकि सूत्रों की मानें तो रॉबर्ट्सगंज स्थित एक निजी अस्पताल में देर रात तक मरीज के परिजनों को मैनेज करने का खेल चलता रहा। वहीं सुचना के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम के मौके पर नहीं पहुँचने पर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला।
सफ़ेदपोस नेता के भय से इस निजी अस्पताल में कार्यवाही से बचती है स्वास्थ्य विभाग की टीम -
वहीं सूत्रों की मानें तो यह अस्पताल सत्ताधारी दल के एक सफ़ेदपोस नेता के संरक्षण में संचालित होने की बात सामने आयी है, वहीं उस सफेदपोस के दबदबे के कारण स्वास्थ्य विभाग की टीम उस हॉस्पिटल पर कार्यवाही से कतराती है। पूर्व में भी एक बार स्वास्थ्य विभाग की टीम उस अस्पताल पर जाँच के लिए गई थी लेकिन उक्त सफेदपोस नेता का फोन आने के बाद टीम को जाँच के बगैर बैरंग लौटना पड़ा था जिसका खामियाजा एक प्रसूता और उसके नवजात बच्चे को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। ऐसे में क्या इस दोषी सिर्फ अस्पताल संचालक ही है या फिर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी बराबर के हिस्सेदार हैं ये एक यक्ष प्रश्न है।




