Sonbhadra News : तिरंगे के सम्मान की 'ड्यूटी' भूला पीएनबी, स्वतंत्रता दिवस के अगले दिन भी बैंक परिसर में फहरता रहा राष्ट्रीय ध्वज
देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ पर तिरंगे की आन, बान और शान को सलाम कर रहा था। करोड़ों देशवासी शहीदों के बलिदान को याद कर रहे थे, जगह-जगह राष्ट्रध्वज फहराया जा रहा था और पूरा देश राष्ट्रभक्ति के रंग......

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11:50 AM, August 16, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ पर तिरंगे की आन, बान और शान को सलाम कर रहा था। करोड़ों देशवासी शहीदों के बलिदान को याद कर रहे थे, जगह-जगह राष्ट्रध्वज फहराया जा रहा था और पूरा देश राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा था लेकिन जनपद मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज में राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को लेकर पंजाब नेशनल बैंक की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बैंक परिसर में विधिवत राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, लेकिन आरोप है कि शाम के बाद बैंककर्मी तिरंगे को सम्मानपूर्वक उतारना ही भूल गए। नतीजा यह रहा कि स्वतंत्रता दिवस बीत जाने के बाद अगले दिन भी बैंक परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहरता नजर आया। बैंक परिसर के सामने से गुजरने वाले राहगीरों ने जब यह दृश्य देखा तो हैरान रह गए और इसकी तस्वीरें मीडिया के साथ साझा कर दीं।
देश शहीदों को नमन करता रहा, बैंक में तिरंगे की सुध लेने वाला कोई नहीं -
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान में स्वतंत्रता दिवस पर बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए, उसी तिरंगे को स्वतंत्रता दिवस के बाद सम्मानपूर्वक उतारने की जिम्मेदारी आखिर किसकी थी?
राहगीरों का कहना था कि "राष्ट्रीय ध्वज को फहराना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उसके सम्मान की पूरी जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है। जब बैंक जैसे संस्थान में ही ऐसी लापरवाही सामने आएगी तो आम लोगों को क्या संदेश जाएगा?"
एक अन्य राहगीर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "जिस तिरंगे के लिए हमारे वीरों ने अपना जीवन न्योछावर कर दिया, उसे एक जिम्मेदार संस्थान के परिसर में अगले दिन तक फहरता छोड़ देना बेहद शर्मनाक है। राष्ट्रध्वज के सम्मान में किसी भी तरह की लापरवाही को सामान्य गलती कहकर टालना नहीं चाहिए।"
दूसरे राहगीर ने कहा कि "स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने की फोटो खिंचवाना और कार्यक्रम करना आसान है, लेकिन असली जिम्मेदारी तब सामने आती है जब राष्ट्रीय ध्वज को पूरे सम्मान के साथ उतारा जाए। बैंक प्रबंधन को बताना चाहिए कि आखिर अगले दिन तक तिरंगे को क्यों नहीं उतारा गया?"
‘औपचारिकता’ तक सीमित तो नहीं रह गया राष्ट्रध्वज का सम्मान -
लोगों का सवाल है कि क्या स्वतंत्रता दिवस के आयोजनों में राष्ट्रध्वज फहराना महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है? यदि ऐसा नहीं है तो फिर राष्ट्रीय ध्वज की निगरानी और उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उतारने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
स्थानीय लोगों और राहगीरों ने मामले की गंभीरता से जांच करने और और लापरवाही के लिए जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की मांग की है साथ ही भविष्य में राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़े किसी भी मामले में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।




