बैठक के दौरान टीम ने ग्रामीणों को प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तृत रूप से बताया। टीम ने जानकारी देते हुए बताया कि जिस प्लास्टिक का प्रयोग हम करते हैं, उसको वह बाहर फेंक देते हैं, वहीं प्लास्टिक नालियों में जाम हो जाता है और हमारे तालाब में जमा हो कर जल श्रोत को खराब कर देता है। प्लास्टिक उड़ते-उड़ते खेतों में जाकर मिट्टी में फ़ैल जाता है और वहाँ लगातार मिट्टी पड़ने के बाद वहीं प्लास्टिक मिट्टी के नीचे बैठ जाता है इस तरह प्लास्टिक का एक सतह बैठने लगी है, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। मिट्टी में प्लास्टिक की परत दर परत बैठने से बरसात का पानी भी जमीन में नहीं पहुंच रहा है। जिससे वाटर रिचार्ज में भी समस्या हो रही है। जो प्लास्टिक हम बाहर फेंकते है उसमें खाद्य सामग्री होने पर उसको गाय, भैंस या अन्य जानवर भी खा रहे हैं जिससे वह असामयिक मृत्यु को प्राप्त हो रहे हैं। गांव में प्लास्टिक हमारे कूड़े के रूप में बिखरा हुआ सबसे अधिक कूड़ा है इसलिए प्लास्टिक का प्रयोग कम करें तथा जो प्लास्टिक का प्रयोग कर रहे हैं तथा गुटका या अन्य पान मसाला के जो रैपर खाने के बाद फेंक रहे हैं उसको घर के पास एक बोरी टांग कर उसमें रखें। ग्रामीणों द्वारा प्लास्टिक कलेक्शन के लिए बोरी लगाने के लिए खुद अपने घर से एक एक बोरी देने के साथ लगने में सहयोग करने तथा अपने गांव को प्लास्टिक मुक्त किए जाने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। दो चरणों में इस ग्राम पंचायत में 83 किलो प्लास्टिक इकट्ठा कर आर आर सी पर इकट्ठा किया गया तथा तत्काल मुख्य बस्ती में सभी घर के लोगों द्वारा अपने अपने घरों पर बोरिया टांगी गई। बैठक में ग्राम प्रधान तथा गांव के लोगों द्वारा यह भी निर्णय लिया गया कि सार्वजनिक स्थानों पर भी बोरी टांगी जाएगी जिससे कि लोग प्लास्टिक, चिप्स के रैपर, गुटका के रैपर उस बोरी में रख सकें।वहीं ग्राम प्रधान ने सभी सार्वजनिक जगहों पर बोरी लगाने का निर्णय लिया। ग्राम में चट्टी पर दुकानों पर डस्ट बिन रखने का निर्णय लिया गया जिससे गांव में कूड़ा और प्लास्टिक न फैले।