Sonbhadra News : वज्रपात से लोगों का होगा बचाव, गांवों में अब ‘सुरक्षा कवच’ बनेंगे ताड़-खजूर के पेड़
शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में यह कार्य वज्रपात की घटनाओं से प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में जोखिम न्यूनीकरण की कार्यवाही के रूप में किया जा रहा है।

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7:34 PM, September 29, 2026
- डीएम चर्चित गौड़ के निर्देश—हर चयनित ग्राम पंचायत में लगेंगे कम से कम 100 पौधे
शांतनु कुमार
सोनभद्र । आकाशीय बिजली के खतरे से ग्रामीणों को बचाने की दिशा में सोनभद्र जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। वज्रपात संवेदनशील ग्राम पंचायतों में अब ताड़ और खजूर प्रजाति के पौधों का रोपण कराया जाएगा। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि चिन्हित ग्राम पंचायतों में प्राथमिकता के आधार पर पौधरोपण कराया जाए और लगाए गए पौधों के संरक्षण की भी पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक चयनित ग्राम पंचायत में न्यूनतम 100 पौधे लगाए जाएंगे।
शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम में यह कार्य वज्रपात की घटनाओं से प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में जोखिम न्यूनीकरण की कार्यवाही के रूप में किया जा रहा है। सेंसिंग सेंटर (NRSC) के विश्लेषण के आधार पर राज्य के चिन्हित वज्रपात संवेदनशील क्षेत्रों में पौधरोपण की कार्यवाही प्रस्तावित की गई है। इसी क्रम में जनपद सोनभद्र में भी चिन्हित ग्राम पंचायतों में अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
हर गांव में कम से कम 100 पौधे, मेड़ों पर बनेगा हरित सुरक्षा क्षेत्र
जिलाधिकारी ने निर्देशित किया है कि वीबी जी राम जी योजना के अनुमन्य प्रावधानों के अनुसार चिन्हित ग्राम पंचायतों में पौधरोपण कराया जाए। खेतों एवं फार्म की मेड़ों तथा अन्य उपयुक्त स्थानों पर पाम (ताड़) एवं खजूर की उपयुक्त प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे।
इसके लिए जिला उद्यान अधिकारी से तत्काल समन्वय स्थापित कर ‘बरही’ एवं ‘सोना-100’ प्रजातियों के पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी। खण्ड विकास अधिकारी एवं कार्यक्रम अधिकारी (मनरेगा) इस कार्य की निगरानी करते हुए पौधरोपण अभियान को निर्धारित समयसीमा में पूरा कराएंगे।
पौधे लगाकर भूलना नहीं, संरक्षण की भी होगी पूरी जिम्मेदारी
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहे, बल्कि पौधों के संरक्षण और रख-रखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। ग्राम पंचायत स्तर पर उपयुक्त स्थल का चयन, गड्ढों की खुदाई, पौधरोपण, सुरक्षा व्यवस्था, सिंचाई तथा रोपणोपरान्त देखभाल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिला उद्यान विभाग एवं ग्राम्य विकास विभाग के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए पौधों की उपलब्धता से लेकर रोपण और रोपणोपरान्त संरक्षण तक की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी की जाए।
जिलाधिकारी श्री चर्चित गौड़ ने संबंधित खण्ड विकास अधिकारियों एवं कार्यक्रम अधिकारियों को कार्य की नियमित समीक्षा करने तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का उद्देश्य वज्रपात संवेदनशील क्षेत्रों में जोखिम न्यूनीकरण के उपायों को प्रभावी बनाते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में हरित आवरण को भी बढ़ावा देना है।




