पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ0 धर्मवीर तिवारी ने कहा कि "रेलवे और निर्माण एजेंसी को यह समझना होगा कि सड़क बंद करना केवल बैरिकेडिंग लगाने भर का मामला नहीं है, बल्कि हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी इससे प्रभावित होगी। अगर वैकल्पिक मार्ग तैयार किए बिना रास्ता बंद किया गया तो स्कूली बच्चों, मरीजों, व्यापारियों और ग्रामीणों को भारी संकट झेलना पड़ेगा। विकास कार्य जरूरी है, लेकिन जनता को परेशान कर नहीं। पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित हो, उसके बाद ही पूर्ण रूप से मार्ग बंद किया जाए। उन्होंने आगे कहा कि रेलवे प्रशासन ने न तो समय रहते कोई स्पष्ट सूचना जारी की और न ही यह बताया कि रास्ता कितने दिनों तक बाधित रहेगा। “प्रशासन को जनता को अंधेरे में रखकर काम नहीं करना चाहिए। यह सड़क सैकड़ों गांवों को जोड़ती है। यदि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई तो लोगों में आक्रोश बढ़ेगा।"