Sonbhadra news : 2.75 करोड़ के जनजातीय छात्रावास निर्माण पर जांच के आदेश, गड़बड़ी मिली तो होगी कार्यवाही
2.75 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन 100 बेड के जनजातीय छात्रावास को लेकर सामने आई शिकायतों पर अब जांच और कार्यवाही का शिकंजा कसता नजर आ रहा है।

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8:50 AM, September 10, 2026
राजा (संवाददाता)
-- निर्माण सामग्री के नमूने लैब में भेजने के निर्देश; कम मजदूरी की शिकायत पर भी अधिकारियों को कार्यवाही का फरमान
अमवार। दुद्धी ब्लॉक क्षेत्र के नगवा पुनर्वास कॉलोनी में करीब 2.75 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन 100 बेड के जनजातीय छात्रावास को लेकर सामने आई शिकायतों पर अब जांच और कार्यवाही का शिकंजा कसता नजर आ रहा है। निर्माण की गुणवत्ता और मजदूरों को कम मजदूरी दिए जाने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए एसी-एसटी आयोग के उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार ने मौके पर ही जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
लैब में होगी निर्माण सामग्री की जांच
स्थलीय निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने निर्माण में इस्तेमाल हो रहे बोल्डर, बालू और सीमेंट सहित अन्य सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। ग्रामीणों का आरोप था कि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। बरसात के बीच नींव भरने का कार्य कराए जाने पर भी आपत्ति जताई गई।
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आयोग के उपाध्यक्ष ने मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार को निर्माण सामग्री के नमूने लेकर लैब में जांच कराने के निर्देश दिए। अब जांच रिपोर्ट से तय होगा कि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री निर्धारित मानकों पर खरी उतरती है या नहीं।
जांच में गड़बड़ी मिली तो जिम्मेदारों पर कार्यवाही
निरीक्षण के दौरान निर्माण स्थल पर तकनीकी निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे। ऐसे में जांच सिर्फ सामग्री तक सीमित नहीं रहने की बात सामने आई है। निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी या किसी स्तर पर अनियमितता सामने आने पर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है।
मजदूरों की शिकायत पर भी कार्यवाही के निर्देश
निर्माण कार्य में लगे मजदूरों ने आयोग के उपाध्यक्ष के सामने आरोप लगाया कि उन्हें 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जा रही है। निर्धारित मजदूरी की मांग करने पर ठेकेदार के मुंशी द्वारा काम से हटाने की शिकायत भी मजदूरों ने की।
मजदूरों की शिकायत को भी गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी ग्रामीणों की नजर
करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाला यह छात्रावास जनजातीय विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। इसलिए ग्रामीणों की मांग है कि जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए और यदि निर्माण में गुणवत्ता संबंधी खामी अथवा मजदूरों के अधिकारों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार व्यक्ति चाहे ठेकेदार हो या संबंधित अधिकारी, उसके खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल निर्माण सामग्री की लैब जांच और मजदूरों की शिकायत पर प्रस्तावित कार्यवाही ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है और उसके आधार पर प्रशासन किस पर कार्यवाही करता है।




