Sonbhadra News: आबादी के बीच खनन-ब्लास्टिंग का विरोध तेज, माले व किसान महासभा ने प्रशासन को चेताया, सौंपा ज्ञापन
तहसील क्षेत्र के खैरटिया गांव में आबादी के समीप हो रहे खनन और ब्लास्टिंग के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ रहा है।


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Janpad Mirror
घनश्याम पांडे (संवाददाता)
ओबरा (सोनभद्र) । तहसील क्षेत्र के खैरटिया गांव में आबादी के समीप हो रहे खनन और ब्लास्टिंग के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ रहा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन और अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार नरेंद्र राम को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आबादी के पास हो रहे खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। भाकपा जिला सचिव सुरेश कोल ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि 17 जुलाई को दोपहर करीब 12:47 बजे हुई ब्लास्टिंग के दौरान पत्थरों के टुकड़े उड़कर कई ग्रामीणों के मकानों की खपरैल और आंगन में गिरे। ग्रामीणों ने बताया कि संयोगवश कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन पूरे गांव में दहशत का माहौल है। अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला संयोजक नंदलाल यादव ने कहा कि गांव की आबादी से मात्र 25-30 मीटर की दूरी पर खनन और ब्लास्टिंग की जा रही है, जिससे लोगों की सुरक्षा खतरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्लास्टिंग के दौरान पत्थर उड़कर मवेशियों को भी लग रहे हैं और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। खनन क्षेत्र के पास प्राथमिक विद्यालय भी स्थित है, जहां बच्चे प्रतिदिन आते-जाते हैं। साथ ही, गांव के रास्तों से लगातार टिप्परों के संचालन से दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें धमकियां दी जाती हैं और कुछ लोगों को लालच देकर आंदोलन कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। किसान महासभा ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को ओबरा, सोनभद्र, लखनऊ और दिल्ली तक ले जाया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह केवल खनन का नहीं, बल्कि ग्रामीणों के जीवन, सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा है।
गौरतलब है कि ओबरा थाना क्षेत्र के खैरटिया गांव में आबादी के समीप संचालित पत्थर खदान के खिलाफ शुक्रवार को ग्रामीणों का गुस्सा तब फूट पड़ा था, जब ब्लास्टिंग के दौरान उड़ रहे पत्थरों से जान का खतरा बन गया था। लगातार हो रहे धमाकों से परेशान ग्रामीण बड़ी संख्या में खदान पर पहुंच गए और हंगामा करते हुए खनन कार्य बंद करा दिया था। विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों की भारी भीड़ को देखकर खदान कर्मचारी मौके से भाग निकले थे। आरोप है कि कर्मचारी विस्फोटक सामग्री भी वहीं छोड़कर चले गए थे।
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