Sonbhadra News : एक रास्ता, सैकड़ों बच्चे और फायर एनओसी गायब, लखनऊ हादसे के बाद सोनभद्र में खुली कोचिंग सेंटरों की पोल
लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड में 15 बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है। इस घटना के बाद सोनभद्र जिला प्रशासन भी हरकत में आया और मंगलवार को जिले के विभिन्न कोचिंग...

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sonbhadra
9:19 PM, June 23, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• अग्निशमन विभाग की छापेमारी में बड़ा खुलासा, बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे
• 22 पंजीकृत कोचिंग का दावा, लेकिन जिले में सैकड़ों सेंटरों के संचालन की चर्चा
सोनभद्र । लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड में 15 बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है। इस घटना के बाद सोनभद्र जिला प्रशासन भी हरकत में आया और मंगलवार को जिले के विभिन्न कोचिंग सेंटरों पर औचक निरीक्षण अभियान चलाया गया। जांच के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अग्निशमन विभाग की टीम द्वारा की गई जांच में अधिकांश कोचिंग सेंटरों के पास अनिवार्य फायर एनओसी नहीं मिली। जिला अग्निशमन अधिकारी श्रीराम साहनी ने बताया कि मंगलवार को आठ कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया गया, जिनमें केवल ओबरा और जुगैल के एक-एक कोचिंग सेंटर के पास ही फायर एनओसी पाई गई। बाकी सभी संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर चल रहे कोचिंग सेंटर -
निरीक्षण में सामने आया कि कई कोचिंग सेंटर बिना किसी सुरक्षा मानक के संचालित हो रहे हैं। अधिकांश भवनों में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था नहीं है। कई स्थानों पर एक ही संकरे रास्ते से सैकड़ों बच्चों का आवागमन हो रहा है। इतना ही नहीं, कक्षाओं की क्षमता से कहीं अधिक छात्रों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जिससे किसी भी आपदा की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है।
सरकारी आंकड़े और जमीनी सच्चाई में बड़ा अंतर -
जिला विद्यालय निरीक्षक के अनुसार जनपद में केवल 22 कोचिंग सेंटर पंजीकृत हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है। शहर और कस्बों में बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर बिना पंजीकरण और बिना आवश्यक सुरक्षा मानकों के संचालित हो रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर प्रशासन की नजरों से अब तक ये संस्थान कैसे बचते रहे।
अब जागा प्रशासन -
लखनऊ हादसे के बाद प्रशासनिक सक्रियता जरूर बढ़ी है, लेकिन अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों की जांच होती तो ऐसी स्थिति ही पैदा नहीं होती। फिलहाल प्रशासन ने सभी कोचिंग संचालकों को सुरक्षा मानकों का पालन करने और फायर एनओसी प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं। वहीं जिले में चल रही इस कार्रवाई ने कोचिंग संचालकों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं अभिभावकों के मन में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर नई आशंकाएं भी पैदा कर दी हैं।
छात्रों की सुरक्षा प्राथमिकता -
जिला अग्निशमन अधिकारी श्रीराम साहनी ने बताया कि "लखनऊ में हुई दुखद घटना के बाद जनपद में संचालित कोचिंग संस्थानों एवं लाइब्रेरियों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का विशेष निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कुल 8 संस्थानों की जांच की गई, जिसमें अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकास मार्गों, विद्युत सुरक्षा प्रणाली तथा अन्य सुरक्षा मानकों का गहन परीक्षण किया गया। उन्होंने बताया कि अधिकांश संस्थानों को अग्नि सुरक्षा मानकों के प्रति और अधिक गंभीर होने की आवश्यकता है। सभी संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आपातकालीन निकास द्वार हमेशा खुले एवं अवरोधमुक्त रखें, अग्निशमन यंत्रों का नियमित रखरखाव कर उन्हें क्रियाशील अवस्था में रखें तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षित करें।"
श्रीराम साहनी ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन संस्थानों में कमियां पाई गई हैं, उन्हें आवश्यक सुधार के निर्देश दिए गए हैं। भविष्य में भी ऐसे निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे और अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों का प्रवेश ऐसे संस्थानों में ही कराएं जहां अग्नि सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन के पर्याप्त इंतजाम उपलब्ध हों, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की संभावना को रोका जा सके।




