Sonbhadra News : एक नाम, दो अस्पताल - सिस्टम की नाकामी या मिलीभगत का बड़ा खेल?
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में एक खतरनाक खेल चल रहा है, जहां इलाज के नाम पर सीधे मरीजों की जिंदगी दांव पर लगाई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि एक ही नाम से दो-दो स्थानों दुद्धी और बभनी में....

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10:28 PM, April 15, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में एक खतरनाक खेल चल रहा है, जहां इलाज के नाम पर सीधे मरीजों की जिंदगी दांव पर लगाई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि एक ही नाम से दो-दो स्थानों दुद्धी और बभनी में अस्पताल बेखौफ संचालित हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग या तो पूरी तरह अनजान बना हुआ है या फिर जानकर भी आंखें मूंदे बैठा है। सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में यह ‘अवैध इलाज’ का नेटवर्क फल-फूल रहा है?
एक नाम दो ठिकाने, सिस्टम पर बड़ा सवाल -
जिले में एक ही नाम से अलग-अलग जगहों पर अस्पतालों का संचालन न केवल नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। बिना वैध पंजीकरण, मानकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों के ऐसे अस्पताल मरीजों का इलाज करने का दावा कर रहे हैं। दुद्धी और बभनी में संचालित एक ही नाम के अस्पताल इस बात का बड़ा उदाहरण हैं कि किस तरह नियमों को ताक पर रखकर अवैध इलाज का गोरखधंधा चलाया जा रहा है।
‘सस्ता इलाज’ बन रहा जानलेवा खतरा -
इन अस्पतालों में न तो पर्याप्त चिकित्सा संसाधन हैं और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। गंभीर बीमारियों का इलाज भी बिना किसी विशेषज्ञता के किया जा रहा है। जब मरीज की हालत बिगड़ती है, तो उसे आनन-फानन में दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है, इस बीच की देरी कई बार जानलेवा साबित हो जाती है। वहीं सबसे चिंताजनक बात यह है कि आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र की अशिक्षित और जागरूकता से वंचित आबादी इन अस्पतालों के फैलाए गए दलालों और गुर्गों के नेटवर्क में आसानी से फंस जाती है। गांव-गांव तक सक्रिय यह नेटवर्क मरीजों को झांसा देकर इन अवैध अस्पतालों तक लाता है, जहां इलाज के नाम पर भारी भरकम रकम वसूली जाती है। कई मामलों में स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि गरीब परिवारों को इलाज के खर्च के लिए अपनी जमीन-जायदाद तक गिरवी रखनी पड़ती है। यानी पहले बीमारी की मार, फिर अवैध इलाज के जाल की दोहरी मार झेल रहे हैं जिले का मरीज।
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी, गहराया संदेह -
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग की नजर इन अवैध अस्पतालों पर क्यों नहीं पड़ रही? क्या जांच सिर्फ कागजों तक सीमित है या फिर कहीं न कहीं मिलीभगत का खेल भी चल रहा है? वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, जिससे अवैध अस्पताल संचालकों के हौसले और बुलंद हो गए हैं।



