Sonbhadra News : तपती सड़कें, सूना किनारा... SH-5 पर ‘विकास’ फेल! पेड़ और प्याऊ के अभाव में बेहाल राहगीर, 2027 में बन सकता है बड़ा चुनावी मुद्दा
वाराणसी-शक्तिनगर स्टेट हाइवे (SH-5) पर विकास की रफ्तार तो दिखी, लेकिन पर्यावरण और यात्रियों की सुविधा पूरी तरह हाशिए पर छूट गई। वर्ष 2017 में तैयार हुए इस महत्वपूर्ण मार्ग पर नौ साल बीत जाने के.......

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10:52 PM, April 15, 2026
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । वाराणसी-शक्तिनगर स्टेट हाइवे (SH-5) पर विकास की रफ्तार तो दिखी, लेकिन पर्यावरण और यात्रियों की सुविधा पूरी तरह हाशिए पर छूट गई। वर्ष 2017 में तैयार हुए इस महत्वपूर्ण मार्ग पर नौ साल बीत जाने के बाद भी सड़क किनारे न तो पेड़ों की हरियाली लौटी और न ही राहगीरों के लिए प्याऊ की व्यवस्था हो सकी। हैरानी की बात यह है कि केंद्र स्तर से वृक्षारोपण के स्पष्ट निर्देश जारी होने के बावजूद जिम्मेदार विभागों की सुस्ती ने इस हाइवे को ‘तपती पट्टी’ में बदल दिया है। वहीं यदि किसी राहगीर को इस भीषण गर्मी में प्यास भी लग जाए तो पानी खरीद कर ही पीना पड़ेगा।
तपती सड़क, बेहाल सफर -
अप्रैल के दूसरे सप्ताह में ही तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है। ऐसे में SH-5 पर सफर करना खासकर बाइक सवारों और बगैर एसी वाले वाहनों के यात्रियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। सड़क किनारे छांव देने वाले पेड़ों का अभाव यात्रियों को सीधे धूप के संपर्क में ला रहा है, जिससे सफर थकाऊ और जोखिम भरा हो गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक दोपहर के समय सड़क पर चलना लगभग मुश्किल हो जाता है। कई यात्रियों को चक्कर आना, डिहाइड्रेशन और अत्यधिक थकान जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पेड़ तो कटे लेकिन नहीं हुए नए वृक्ष रोपित, निर्देश भी बेअसर -
हाइवे निर्माण के दौरान सड़क किनारे लगे पुराने और घने पेड़ों को काट दिया गया था। उम्मीद थी कि इसके बाद बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा, लेकिन नौ साल बाद भी यह काम शुरू तक नहीं हो सका। जबकि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा हाइवे किनारे वृक्षारोपण को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल न होना विभागीय उदासीनता को उजागर करता है।
पर्यावरणीय असंतुलन का बढ़ता खतरा -




