कथा प्रसंग पर चर्चा करते हुए मुख्य व्यास पं0 सूर्य लाल मिश्र ने जयंत की कुटिलता और फल प्राप्ति, अत्री मिलन एवं स्तुति, श्री सीता अनसूया मिलन और सीता जी को अनसूया जी का पतिव्रत धर्म कहना, श्री राम जी के आगे प्रस्थान विराट वध और राक्षस वध की प्रतिज्ञा करना, स्वर्ण मृग मरीचिका का मारा जाना, सीता हरण और सीता जटायु रावण युद्ध श्री राम जी का विलाप जटायु प्रसंग, सबरी पर कृपा, नारद राम संवाद आदि विषयों पर चर्चा करते हुए कहा कि ”रामचरितमानस का एक-एक दोहा, चौपाई, छंद मंत्र है और प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, संप्रदाय का हो इसका पाठ करना चाहिए इससे उसे भवसागर से मुक्ति प्राप्त हो सकती है।