Sonbhadra News : पूर्व विधायक की पुण्यतिथि पर सांसद ने प्रशासन पर लगाया आदिवासी खरवार महासभा भवन कब्जा करने का आरोप
सांसद छोटेलाल खरवार ने बताया कि प्रशासन ने इस आदिवासी खरवार भवन को धोखे से कब्जा कर रखा है । उन्होंने बताया कि शिक्षा (कोचिंग) के नाम पर प्रशासन ने एक-दो महीने के लिए यह कह कर मांगा था कि अपनी खुद की

sonbhadra
10:17 PM, January 2, 2026
शान्तनु कुमार
० प्रशासन ने आदिवासियों के साथ धोख़ा किया- सांसद
० शिक्षा केंद्र चलाने के नाम पर मांग कर कब्जा कर लिया भवन- सांसद
० आदिवासी खरवार महासभा भवन पर लगा है पूर्व विधायक स्वo हरि प्रसाद उर्फ घमड़ी खरवार की प्रतिमा
सोनभद्र । रावर्टसगंज लोढ़ी में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी पूर्व विधायक स्वर्गीय हरी प्रसाद उर्फ घमड़ी खरवार की 20वीं पुण्यतिथि मनाया गया । 2 जनवरी को मनाये जाने वाले इस पुण्यतिथि पर विभिन्न जनपदों के अलावा मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और झारखंड से भी खरवार समाज के लोग इकट्ठा होकर धूमधाम से उनकी जयंती मनाते हैं ।
इस अवसर पर वर्तमान सांसद छोटेलाल खरवार ने प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाये । सांसद छोटेलाल खारवार ने कहा कि यहां पर 2017 में सांसद निधि के पैसे से आदिवासी खरवार महासभा भवन का निर्माण कराया गया था। इस दरमियान स्व0 हरि प्रसाद उर्फ घमड़ी की प्रतिमा भी लगाया गया । वह मूर्ति लोगों के चंदे के पैसे से बनवाया गया था ।
सांसद छोटेलाल खरवार ने बताया कि प्रशासन ने इस आदिवासी खरवार भवन को धोखे से कब्जा कर रखा है । उन्होंने बताया कि शिक्षा (कोचिंग) के नाम पर प्रशासन ने एक-दो महीने के लिए यह कह कर मांगा था कि अपनी खुद की बिल्डिंग बन जाएगी तो खाली कर दिया जाएगा । सांसद का कहना है कि अब प्रशासन आदिवासी खरवार भवन को खाली नहीं करना चाह रहा, जबकि इसके लिए उन्होंने कई बार पत्र भी लिखा है । अब प्रशासन उसे सरकारी भवन बताकर खाली नहीं कर रहा है । उनका कहना है कि उसमें शिक्षा का काम चल रहा है ।
सांसद ने कहा कि आदिवासियों के साथ धोखा हुआ है, जबकि जनपद में एक ही आदिवासी खरवार भवन है । सांसद छोटेलाल खरवार का कहना है कि निधि का पैसा हर विद्यालय को जाता है तो क्या प्रशासन हर विद्यालय को अपने कब्जे में रखेंगे ।
सांसद का आरोप है कि आज के दिन हमेशा बच्चों की छुट्टी कर दिया जाता था ताकि कार्यक्रम अच्छे से हो सके लेकिन आज जानबूझकर आदिवासी भवन में पढ़ाई कराई जा रही है ।
सांसद का कहना है कि वे भवन को लेकर कई पत्राचार कर चुके हैं अब विधिक राय ली जाएगी साथ ही यह मामला सड़क से लेकर सदन तक लड़ा जाएगा । उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में आदिवासियों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा ।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर जब भवन निधि से बना था तो किसके आदेश पर मूर्ति अनावरण का आदेश दिया गया और फिर इस भवन का नाम आदिवासी खरवार महासभा भवन रखा गया । उस समय प्रशासन ने क्यों नहीं आपत्ति जताई।
बहरहाल इन दिनों देश में जब जातिगत राजनीति चरम पर है, ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि खरवार जाति का यह मुद्दा आने वाले समय में काफी गर्म हो सकता है।



