Sonbhadra News : पनारी में ओबरा पावर प्लांट की राख का कहर: फसलों के साथ जीवन भी संकट में, 'अपना दल एस' का उग्र प्रदर्शन
पावर प्लांट से उड़ने वाली राख और पाइप फटने से हुए जलभराव के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इस गंभीर समस्या को लेकर रविवार को अपना दल (एस) के नेताओं और ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया।

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7:35 PM, March 1, 2026
घनश्याम पांडे (संवाददाता)
ओबरा (सोनभद्र)। चोपन ब्लॉक के ग्राम पंचायत पनारी अंतर्गत चकाड़ी गांव में ओबरा थर्मल पावर प्लांट द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। पावर प्लांट से उड़ने वाली राख और पाइप फटने से हुए जलभराव के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इस गंभीर समस्या को लेकर रविवार को अपना दल (एस) के नेताओं और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व प्लांट प्रबंधन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
धूल और राख से घुट रहा है दम
ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट से निकलने वाली 'फ्लाई ऐश' (राख) पूरे गांव में फैल रही है। इसके राख कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत और फेफड़ों की बीमारियां हो रही हैं।खेतों में राख की मोटी परत जमने से खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। घरों के भीतर तक राख पहुंचने से खाना बनाना और पानी पीना भी दूश्वार हो गया है।
फटे पाइप ने बढ़ाई मुसीबत
हाल ही में राख ले जाने वाली पाइप लाइन फटने से स्थिति और भी भयावह हो गई है। पाइप से निकले मलबे और पानी ने गांव की मुख्य सड़क को क्षतिग्रस्त कर दिया है और कई एकड़ कृषि भूमि जलमग्न होकर बंजर होने की कगार पर है।
दी चेतावनी
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अपना दल (एस) के पूर्व प्रदेश सचिव रविन्द्र सिंह यादव जिला महासचिव शिवदत्त दुबे और सत्य प्रकाश पटेल विधानसभा उपाध्यक्ष ओबरा ने कहा कि विकास के नाम पर ग्रामीणों की बलि नहीं चढ़ने दी जाएगी। उन्होंने मांग की कि प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा दिया जाए और प्रदूषण नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।"प्लांट प्रबंधन ग्रामीणों के जीवन से खिलवाड़ कर रहा है। यदि जल्द ही पाइप की मरम्मत और राख के निस्तारण का सही प्रबंध नहीं हुआ, तो हम बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।"
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल
इस दौरान मुख्य रूप से हनीफ अंसारी, रामआसरे, रमेश यादव, असमुद्दीन, राजेंद्र प्रजापति, डांगर यादव, राजन अंसारी, असलम अंसारी, रामबली अगरिया, धनेश्वर अगरिया, बबूला अगरिया, रामप्रसाद खरवार, जवाहिर बैगा, रीता बैगा, बुलवा बैगा और रामसिंह बैगा सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।




